मोक्ष नगरी वाराणसीमें अन्तिम क्रियाका भी व्यापार, कन्धा देनेके लिए चल रहा मोल-भाव, लग रही है बोली


२६ अप्रैल, २०२१
हरिश्चंद्र घाटपर अन्तिम यात्राके लिए कोरोना संक्रमितोंके परिजन अत्यधिक कष्ट झेल रहे हैं । हरिश्चंद्र घाटपर अन्तिम यात्राके मध्य चार कन्धे भी अब चारसे पांच सहस्र रुपयेमें उपलब्ध हो रहे हैं । कोरोना संक्रमणके कारण मृत्यु होनेपर परिजन भी अन्तिम यात्रामें सम्मिलित नहीं हो पा रहे हैं । स्थितियां ऐसी बन जा रही हैं कि शवके साथ एक या दो व्यक्ति ही घाटपर पहुंच रहे हैं । ऐसेमें शवको मार्गसे लेकर चितातक पहुंचानेके लिए चार कन्धोंकी बोली चारसे पांच सहस्र रुपयेमें लग रही है । कुछ युवाओंकी टोली पैसोंके लिए अपने प्राण हथेलीपर रखकर इस कार्यको कर रही है। एक ओर आवश्यकता है तो दूसरी ओर विवशता । मोक्षकी नगरी काशीमें अब चार कन्धे भी बिना पैसोंके उपलब्ध नहीं हो रहे हैं ।
       इसे ही दुर्दिन कहते हैं, जब परिजनकी मृत्युके पश्चात अर्थीको कन्धा देनेके लिए चार व्यक्ति भी न मिलें और इस महामारीमें अवसरवादियोंको अपने लाभके अवसर दिखने लगे । वाराणसीको मोक्षकी नगरी कहा जाता है, ऐसेमें जहांका सांसद प्रधानमन्त्री हो और प्रदेशका मुख्यमन्त्री मठाधीश हो वहां ऐसे कुकृत्य हो रहे हैं, तो  अन्य स्थानमें क्या दुर्दशा होगी, किंचित सोचें ! प्रशासनको इस स्थितिसे निपटनेके लिए अतिशीघ्र प्रशासनको अतिरिक्त शववाहन एवं स्वयंसेवी संस्थाओंके साथ मिलकर इस स्थितिके लिए उपाय योजना निकालना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : अमर उजाला


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