२९ अप्रैल, २०२१
त्रिपुरामें एक ‘डीएम’को सेवासे निलम्बित कर दिया गया है । अगरतलाके जनपद अधिकारी ‘डीएम’ शैलेश कुमार यादवने विवाहके एक समारोहमें पुलिसकर्मियों सहित पहुंचकर, विवाहके मण्डपको ध्वस्त कर दिया, पुजारीको अपमानित करते हुए थप्पड मारकर गिरा दिया, अतिथियोंके साथ मारपीट की, वृद्ध अतिथियोंको भी नहीं छोडा, यहांतक कि उसने उपस्थित महिलाओंके साथ भी दुर्व्यवहार किया । इस विवाह समारोहके लिए पचास अतिथियोंके सम्मिलित होनेकी स्वीकृति भी इसी ‘डीएम’ने ही दी थी; किन्तु विवाह मण्डपमें ‘डीएम’ने अपनी उसी स्वीकृतिको लेकर फाड डाला । अन्तमें जाते समय वह अपने साथ १९ अतिथि महिलाओं और १२ पुरुषोंको पकडकर, अपने साथ थानेमें ले गया, जबकि एक भी महिला पुलिसकर्मी उसके साथ नहीं आई थी ।
भाजपा विधायकोंद्वारा परिवाद करनेपर मुख्य सचिव मनोज कुमारसे त्रिपुराके मुख्यमन्त्रीने विवरण मांगा । ‘डीएम’ने अपने दुर्व्यवहारके लिए क्षमा मांगी; किन्तु संज्ञान लेते हुए मुख्यमन्त्रीने ‘डीएम’ शैलेश कुमारको सेवासे पदच्युत कर दिया ।
अधिकारीको अनुचित प्रकरण होनेपर कार्यवाही करनेका अधिकार है; किन्तु मर्यादामें रहकर । विवाह करनेवाले कोई चोर अथवा डकैत तो थे नहीं, सामान्य हिन्दू थे, जो विवाह कर रहे थे । क्या जिलाधिकारी किसी ‘निकाह’में जाकर ऐसा कर सकते थे ? क्या किसी मौलवीको थप्पड मारनेका साहस करते ? कदापि नहीं ! ऊंचे पदोंपर प्रतिष्ठित हो जानेपर, बडेसे-बडे पदाधिकारियोंका भी विवेक समाप्त हो जाता है । अहङ्कारवश वे दूसरोंकी मान-मर्यादाओंको अनदेखाकर अपना अधिकार प्रदर्शित करने लगते हैं । पदकी उन्मत्तामें विधान और मर्यादाकी सीमा लांघ जाते हैं । ऐसे पदाधिकारियोंको निलम्बितकर, शारिरिक एवं आर्थिक रूपसे भी दण्डित किया जाना उचित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : जागरण
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