‘रटगर्स यूनिवर्सिटी’में ‘हिन्दूफोबिया’के विरुद्ध प्रस्ताव पारित, वामपन्थी प्राध्यापक अब हिन्दू छात्रोंके माता-पिताके पीछे


३० अप्रैल, २०२१
     २४ अप्रैल २०२१ को ‘रटगर्स यूनिवर्सिटी स्टूडेंट असेम्बली’ने ‘हिन्दूफोबिया’की परिभाषाको स्वीकारते हुए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया । यह प्रस्ताव ‘अंडरस्टैंडिंग हिन्दूफोबिया कॉन्फ्रेंस’के निष्कर्षके १४ दिवस पश्चात आया ।
     इस सम्मेलनको विश्वविद्यालयमें निरन्तर ‘हिन्दूफोबिक’ प्रकरण देखते हुए आयोजित किया गया था । प्रकरणके सम्बन्धमें हिन्दू छात्रोंके समूहने मार्चमें याचिका डाली थी । इसमें विश्वविद्यालयसे विवादित इतिहासकार व प्राध्यापक ऑड्रे ट्रूस्केके विरुद्ध कार्यवाही करनेकी बातकी गई थी ।
     इसके पश्चात भी प्राध्यापक ऑड्रे ट्रूस्के सुधरनेके स्थानपर उन छात्रोंके अभिभावकोंको ‘स्टॉक’ करने लगीं, जिन्होंने सम्मेलनमें भाग लिया था । इसके प्रमाण, ‘ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी’में ‘नस्लवाद’का लक्ष्य बननेवाली छात्रा ‘यूनियन’की पूर्व अध्यक्ष रश्मि सामन्तने भी प्रस्तुत किए ।
     ‘हिन्दूफोबिक ऑड्रे ट्रूस्के’के विरुद्ध यह विषय हिन्दू छात्रोंद्वारा उठाया गया था । छात्रोंने विश्वविद्यालयको पत्र लिखकर बताया कि ऑड्रे इतिहासके नामपर ‘हिन्दूफोबिक फिक्शन’ विक्रय कर रही हैं । याचिकामें कहा गया कि ऑड्रेने औरंगजेबद्वारा किए गए हिन्दू नरसंहारको विशेष महत्त्व नहीं दिया ।
      ७ मार्चको हिन्दू समूहके छात्रोंने बताया था कि कैसे ऑड्रे ट्रूस्के विश्वविद्यालयमें हिन्दुओंके विरुद्ध वातावरण बना रहा है । अमेरिकामें हुई हिंसाके समय ट्रुस्केने ही भारतीय झण्डेको देख हिन्दू दक्षिणपन्थियोंको घेरा था । इसके पश्चात उन्होंने भगवद्गीताको लेकर असत्य बातें कहीं और साथमें सामूहिक बलात्कार जैसे प्रकरणोंको महाभारतके प्रकरणके समतुल्य रख बताया कि हिन्दू संस्कृतिमें बलात्कारकी परम्परा है ।
    इन घटनाओंके पश्चात रटगरके कई संकाय सदस्योंने ऑड्रे ट्रूस्केका समर्थन किया, जिसे देख हिन्दू छात्र इतना व्यथित हुए कि उन्होंने विश्वविद्यालयमें आवेदन करनेका निर्णय लिया । छात्रोंने ‘हिन्दूफोबिया’पर एक सम्मेलन किया । इसमें कुछ संशोधनोंके साथ ‘हिन्दूफोबिया’की एक नूतन परिभाषा दी गई, जो इस प्रकार है, “सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) और हिन्दुओंके प्रति विरोधी, विनाशकारी, और अपमानजनक व्यवहार और सामूहिक व्यवहार, जो भय या घृणा प्रकट कर सकता है ।”
     हिन्दुओंके विरुद्ध चल रहे इस अन्तरराष्ट्रीय षड्यन्त्रको समाप्त करने हेतु सभी हिन्दुओंको एकत्र होना चाहिए और वहांके शासनसे बात करनी चाहिए व ऐसे लोगोंको दण्डित करवाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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