अनुभव शर्माके परिवारद्वारा दाह-संस्कारके मना किए जानेपर मोहम्मद यूनुसने किया दाह संस्कार, ‘मीडिया’ गुटके इस असत्यकी खुली पोल
३० अप्रैल, २०२१
असत्य फैलानेवाली वामपन्थी समाचार वाहिनियां ‘कोरोना’ कालमें होती मृत्युपर भी असत्य फैलानेसे नहीं लजा रहीं । एक छायाचित्र ‘वायरल’ हुआ, जिसमें कहा गया कि मुजफ्फरनगरमें अनुभव शर्माकी ‘कोरोना’से मृत्यु होनेपर उनके परिजन जब दाह संस्कार करने आगे नहीं आए, तो उनके मित्र मोहम्मद यूनुसने उनका दाह संस्कार किया । इस समाचारको रवीश कुमार, अभिसार शर्मा, मोहम्मद जुबेर सहित अनेक लोगोंने साझा किया । अभिसार शर्माके ‘ट्वीट’पर तो २७००० ‘शेयर्स’ किए गए ।
‘स्वराज्य’की पत्रकार स्वाति गोयलने अनुभवके भाईसे बात की, तो ज्ञात हुआ कि उनका परिवार इस झूठे समाचारसे व्यथित है । उनके भाई शरदने कहा कि उन्होंने स्वयं अनुभवका दाह संस्कार किया । उनके परिजन भी तब वहां उपस्थित थे । शरदने बताया कि अग्नि अधिक प्रज्ज्वलित हो, इस हेतु यूनुस उस छायाचित्रमें राल डालता दृष्टिगत हो रहा है । उससे पूर्व वहां उपस्थित पण्डितजीने ५ किलो राल डाला; परन्तु उनका छायाचित्र किसीने साझा नहीं लिया ।
अनुभवको क्या हुआ था ?, यह पूछनेपर उन्होंने बताया कि ४-५ दिनोंसे उनकी भुजाओंमें वेदना थी । उन्हें ‘कोरोना’ होता तो हमें अन्तिम संस्कारके लिए शव प्राप्त नहीं होता ।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ने झूठा समाचार दिया था कि तेलंगानाके एक हिन्दू परिवारमें मृत्यु होनेपर अन्य धर्मीय लोगोंने उसके शवको कन्धा दिया तथा अन्तिम संस्कारकी व्यवस्था तथा सम्बन्धियों हेतु भोजनकी भी व्यवस्था की, जबकि मृतकके भाईने व्यथित होकर बताया कि ५ लोगोंने आकर कहा कि वे उसके पिताके मित्र हैं । उन्होंने अर्थीको कन्धा देकर छायाचित्र पत्रकारोंको दे दिया ।
अगस्त २०२० में भी ‘वायरल’ हुए समाचारमें मुसलमानोंका समूह किसी हिन्दू शवको कन्धा देता दिखाई दे रहा था । समाचारमें बताया था कि ये सभी ‘तबलीगी जमात’के लोग हैं, जो किसी ‘कोरोना’ सङ्क्रमित हिन्दू चिकित्सककी मृत्युपर अपना धार्मिक कार्य त्यागकर दाह संस्कार करवाने आए थे ।
वामपन्थी पत्रकार महामारीके इस विकट कालमें भी ऐसी निकृष्ट स्तरकी पत्रकारिता कर रहे हैं । विशेषता यह कि इनमें अधिकतर जन्म हिन्दू हैं । इनकी मानसिकता ही हिन्दूद्रोही है; अतः ये असत्य फैलाकर मुसलमानोंको दयावान, सभ्य, संस्कारी बतानेको छटपटाते रहते हैं । जब किसी तबरेज चोर अथवा अखलाककी मृत्यु होती है, तो ये रुदन करने लगते हैं; परन्तु किसी हिन्दूपर अत्याचार हो तो ये मौन साध लेते हैं । ऐसी झूठी पत्रकारिता करनेवालोंके विरुद्ध मानहानि प्रकरण प्रविष्टकर इन्हें दण्डित किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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