मद्रास उच्च न्यायालयकी टिप्पणीको लेकर उच्चतम न्यायालय पहुंचा निर्वाचन आयोग, सोमवारको होगी सुनवाई


०१ मई, २०२१
मद्रास उच्च न्यायालयकी कठोर टिप्पणियोंके विरुद्ध चुनाव आयोगने उच्चतम न्यायालयका द्वार खटखटाया है । आयोगने एक याचिका प्रविष्ट की है, जिसमें मद्रास उच्च न्यायालयकी अपमानजनक टिप्पणीको हटानेकी मांगकी गई है । निर्वाचन आयोगने याचिकामें कहा है कि उच्च न्यायालय स्वयं एक संवैधानिक एवं स्वतन्त्र संस्था है, जबकि निर्वाचन आयोग भी संवैधानिक संस्था है; इसलिए उच्च न्यायालयकी इस प्रकारकी अपमानजनक टिप्पणीसे हमारी छवि विकृत हुई है । अब इस याचिकापर सोमवारको न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूडकी अध्यक्षतावाली पीठ सुनवाई करेगी ।
उल्लेखनीय है कि २६ अप्रैलको एक सुनवाईके मध्य मद्रास उच्च न्यायालयने कहा था कि देशमें कोरोनाकी द्वितीय लहरका उत्तरदायी कोई और नहीं, आपकी संस्था है, चुनाव आयोग है । उच्च न्यायालयने आरोप लगाते हुए कहा था कि इस अनुत्तरदायी व्यवहार एवं असतर्कताके लिए आपके अधिकारियोंपर हत्याका अभियोग (मुकदमा) प्रविष्ट होना चाहिए । यह बात कठोर भले लगे; किन्तु अनुचित नहीं लगती । उच्च न्यायालयने कहा था कि जब एक नागरिक जीवित रहेगा तभी जाकर वह उन अधिकारोंका उपयोग कर पाएगा, जो उसे एक लोकतन्त्रमें मिलते हैं । आयोगके अधिवक्ता अमित शर्माने कहा कि हमने उच्च न्यायालयके आदेशके विरुद्ध याचिका प्रविष्ट की है । निर्वाचन आयोगने याचिकामें कहा है कि मद्रास उच्च न्यायालयकी ऐसी टिप्पणीसे आयोगकी छवि धूमिल होती है । मद्रास उच्च न्यायालयने कठोर टिप्पणी करते हुए कहा था कि चार राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशमें चुनावके मध्य कोविड-१९ नियमोंका अनुपालन करानेमें असफल निर्वाचन आयोगके अधिकारियोंपर सम्भवतः हत्याका अभियोग चलना चाहिए ।
      जब समूची धरापर कोरोना प्रकोपसे सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ है ऐसे समयमें भी निर्वाचन आयोगको अपनी छविकी अधिक चिन्ता हो रही है, इसीको ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ कहना उचित है । ऐसे पदोंपर पदस्थ अधिकारियोंको संवैधानिक व अधिकार शक्तियोंका मद ही सर्वोपरि प्रतीत हो रहा है । घोर सङ्कटकालमें प्रजाके परमार्थ हेतु सभी संस्थाओं व शक्तियोंको अतिशीघ्र मतभेद शून्यकर, निःस्वार्थ भावयुक्त सामूहिक सक्रियतासे अग्रणीशील होना चाहिए, यही कालकी मांग है । कोरोना कालमें चुनावको करवाना यह एक पूर्णतः अनुचित निर्णय था, प्रजा रहेगी तभी तो चुनाव होगा यह बात इन बुद्धिजीवियोंको समझमें क्यों नहीं आती है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : अमर उजाला


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