बंगालमें आदिवासियोंके गांव जलाए गए : लूट, शारीरिक शोषण, हत्याका नंगा नाच
०५ मई, २०२१
बंगालमें चुनाव परिणामोंके आते ही राजनीतिक गुण्डोंका आतंक चारों ओर दिखाई दे रहा है । ये राजनीतिक गुण्डे केवल भाजपा कार्यालय और कार्यकर्ताओंके घरोंको ही राख नहीं कर रहे; अपितु हिन्दू मन्दिरों, उनकी ‘दुकानों’ और महिलाओंको भी हिंसाका लक्ष्य बना रहे हैं । अब समाचार मिला है कि पुरबा बर्धमान स्थित कंकोरा जनपदके आउसग्राममें ३ मईको पूरा आदिवासी गांव जला दिया गया । ग्रामीण अपने घरोंसे भाग गए और जंगलोंमें जाकर छुप गए हैं ।
कल भाजपाके राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डाने घटनाओंके विरोधमें धरना दिया और कहा कि बंगालसे लगभग एक लाख लोग पलायनकर असम चले गए हैं ।
उन्होंने यह भी कहा कि आज बंगालमें जिस प्रकारकी हिंसा हो रही है, ऐसी हिंसा भारत विभाजनके समय हुई थी । हिंसापर महिला आयोगने भी कार्यवाहीकी मांग की है ।
यह आश्चर्यजनक है कि जिन्हें कार्यवाही करनी चाहिए, वे धरना दे रहे हैं ! यह आजके राजनेताओंकी अक्षमताको दर्शाता है । आनेवाले हिन्दू राष्ट्रमें ऐसा पाप अक्षम्य होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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