अन्न भण्डारणको सुरक्षित कैसे रखें ? (भाग-३)


दीर्घकालतक चावलका भण्डारण करनेकी कुछ पद्धतियां (भाग-इ)
जिस आपातकालकी बात द्रष्टा सन्त कर रहे थे वह आ चुका है और यह अभी दिसम्बर २०२४ तक चलेगा । कभी महामारी, कभी प्राकृतिक आपदाएं, कभी गृहयुद्ध तो कभी विश्व युद्धके कारण आपात स्थिति निर्मित होगी । ऐसी स्थितिमें हमें इस कालमें कुछ पूर्वसिद्धताके करके रखनी होगी और इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण है, अन्नका भण्डारण ।
पहले सभी गृहस्थ अपने घरोंमें वर्षभरका अनाज रखते थे और आज भी कृषक वर्ग ऐसा करता है । विगत दशकोंमें नगरोंमें जाकर रहनेवाले लोगोंके घर छोटे होने लगे हैं और एकल परिवार व्यवस्था आनेके कारण यह सब पारम्परिक व्यवस्थाएं नष्ट होती चली गईं । आज सामान्य गृहस्थको ज्ञात ही नहीं है कि अनाजका भण्डारण कैसे करें ? इसलिए इस लेखमालाको आरम्भ किया है । वर्तमान समयमें कोरोना महामारीके कारण अनेक राज्योंके अनेक स्थानोंपर पूर्ण गृहबन्दी (लॉकडाउन) या आंशिक गृहबन्दी है । पिछले वर्ष हुई इसी महामारीके उपरान्त भी तीन माहकी गृहबन्दीसे गृहस्थोंने कुछ नहीं सीखा ! अब अनेक घरोंमें आज भोजनकी समस्या हो रही है । इस स्थितिसे सभी गृहस्थ सीख लें एवं अन्न भण्डारणकी पद्धतिको सीखकर, इसका पालन करें; क्योंकि आगे विश्व युद्धमें पेट्रोल-डीजल न मिलनेके कारण यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी और ऐसेमें चारों ओर हाहकार मचेगा; इसलिए पूर्वसिद्धता करके रखें !
चावलका भण्डारण कैसे कर सकते हैं ? कल इसकी दो पद्धतियोंके विषयमें आपको बताया गया था, आज और दो पद्धतियोंके विषयमें जानेंगे ।
* मेथीकी सूखी पत्तियां मिलाकर रखनेसे भी चावल सुरक्षित रहते हैं ।
* करेलेके सूखे छिलके मिलाकर रखनेसे भी कीडे नहीं लगते ।



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