‘आतङ्कियोंके लिए मध्य रात्रिको खुलता है सर्वोच्च न्यायालय’: बंगाल हिंसापर प्रविष्ट आवेदनकी नहीं हुई त्वरित सुनवाई


०७ मई, २०२१
  ‘इंडिक कलेक्टिव’ नामक संस्थाने पश्चिम बंगालमें हो रही राजनीतिक हिंसाके विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालयमें आवेदन प्रविष्ट किया था । इसे सुनवाईके लिए त्वरित सूचीबद्ध करनेकी मांग की गई थी ।  ज्ञातव्य है कि ३ मई २०२१ को मध्याह्नमें ये आवेदन डाला गया था । संस्थाने प्रतिवाद किया है कि इसके अगले दिवस मध्याह्नतक सर्वोच्च न्यायालयके पंजीयकद्वारा पूछे गए सभी प्रश्नोंके उत्तर दे दिए गए थे । जो भी संशय थे, उनका निदान कर दिया गया था । बंगालकी वस्तुस्थितिको देखते हुए इसकी त्वरित सुनवाईकी मांग की गई थी; परन्तु ०५ मई २०२१, बुधवारको इसपर सुनवाई नहीं हो सकी । इसपर संस्थाने अप्रसन्नता प्रकटकी है ।
  संस्थाद्वारा ६ मईको अत्यावश्यक द्वितीय पत्र भेजा गया; परन्तु उसे भी अस्वीकार कर दिया गया । ‘इंडिक कलेक्टिव’ने ‘ट्विटर’के माध्यमसे कहा, “ये अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि दण्डित आतङ्कियोंके लिए सर्वोच्च न्यायालय मध्य रात्रिको खुल सकता है; परन्तु पश्चिम बंगालमें राजनीतिक हिंसाके विरुद्ध आवेदन ‘लिस्ट’तक नहीं की जा रही । अभी भी हत्याएं हो रही हैं । स्पष्ट है कि कुछ लोग अन्योंसे अधिक महत्वपूर्ण हैं । ”
  बता दें कि पश्चिम बंगालमें हिंसा रुकनेका नाम नहीं ले रही है । गत २ दिवसोंमें २ ‘भाजपा’ एवं १ ‘आरएसएस’ कार्यकर्ताकी हत्याका समाचार सामने आया है ।
    जिस राष्ट्रकी न्याय व्यवस्था देशद्रोहियोंकी तो मध्य रात्रिमें भी पुकार सुनती हो; परन्तु अपने ही राष्ट्की दुर्दशा देखकर मौन धारण कर लेती हो । ऐसी न्याय व्यवस्थाको परिवर्तितकर, धर्मनिष्ठ व्यवस्थाकी स्थापना होना चाहिए । ये समयकी मांग है; अतः हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना शीघ्रताशीघ्र होनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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