◆ घाव : घावपर मधुकी पट्टी बांधना लाभकारी है या एक भाग पीला मोम और चार भाग मधु मिलाकर पट्टी बांधें । मोमको उष्ण करके मधुमें मिला लें, मरहम बन जाएगा, जो घाव अन्य औषधियोंसे ठीक नहीं होते हों, वह भी इस प्रयोगसे ठीक हो जाते हैं ।
◆ अग्निसे जलना : जले हुए अंगोंपर मधुका लेप करनेसे जलन कम होती है । घाव होनेपर भी जबतक घाव ठीक न हो, मधु लगाते रहना चाहिए । घाव ठीक होनेपर जले हुए भागपर श्वेत ‘धब्बे’ बने रहते हैं । इन ‘धब्बों’पर मधु लगाकर पट्टी बांधते रहनेसे भी धब्बे मिट जाते हैं ।
◆ स्नायु शक्तिवर्धक : मधुके सेवनसे स्नायु विकार संस्थानकी दुर्बलता दूर होती है ।
◆ अस्थिभंग होना : अस्थि (हड्डी) टूट जानेपर मधुका सेवन करते रहनेसे अस्थि जुडनेमें सहायता मिलती है ।
◆ मलबद्धता (कब्ज) : मधु प्राकृतिक हलका विरेचक है । प्रातःकालके समय तथा रात्रिको सोनेसे पूर्व मधु स्वच्छ जल या दूधमें मिलाकर पीएं । मधुका उदरपर शामक प्रभाव पडता है ।
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