‘बॉडीकिट’से कोरोना मृतकके शवको निकाल १५० धर्मान्धोंने निकाला ‘जनाजा’, २१ दिनोंमें २१ मर गए


०८ मई, २०२१
राजस्थानके सीकर स्थित खीरवा ग्राममें १५० धर्मान्धोंद्वारा एक कोरोना मृतकका शव निकालकर, ‘जनाजा’ निकालनेके दुष्परिणामसे समूचा ग्राममें सङ्कट आ गया है । सङ्क्रमणके कारण विगत २१ दिवसोंमें २१ लोगोंके ‘जनाजे’ उठ चुके हैं । कुछ दिवस पूर्वतक इस ग्रामके लोग कोरोना रोकथामके प्रति गम्भीर नहीं थे; किन्तु निरन्तर हो रही सङ्क्रमणके कारण मृत्युसे अब वो भी आड्तंकित है ।
खीरवा ग्राममें सङ्क्रमणका आरम्भ २१ अप्रैल, २०२१ से हुआ । इस ग्रामके मोहम्मद अजीज गुजरातमें व्यापार करते थे, जिनकी कोरोना सङ्क्रमणसे मृत्यु वहीं हो गई । इसके पश्चात ‘बॉडीकिट’में लपेटकर (‘पैक’कर) उनके शवको कब्रिस्तान ले जानेके स्थानपर उनके घर ले जाया गया । जहांपर परिजनने शवको ‘बॉडीकिट’से बाहर निकालकर कब्रिस्तानमें ‘दफनाने’ ले गए और ‘जनाजे’ हेतु १५० लोग उपस्थित हुए । जिसके पश्चात प्रतिदिन गांवमें किसी न किसीकी मृत्यु होने लगी । आरम्भमें वृद्धोंकी मृत्यु होनेपर ग्रामीणोंने गम्भीरतासे नहीं लिया; किन्तु मृत्युका क्रम थमा नहीं । प्रशासनने भी अपनी जांचमें ग्रामीणोंको ही दोषी ठहराया है । इसके पश्चात प्रशासनने गांवमें निरीक्षण किया । इसमें सामने आया कि पूरे प्रखण्डमें सबसे न्यूनतम टीकाकरण खीरवा ग्राममें ही हुआ है । स्थानीय नागरिकोंने न केवल आरम्भिक लक्षणोंको छुपाया; अपितु सर्वेक्षणमें भी सहयोग नहीं किया । उन्हें निःशुल्कमें औषधियां भी दी गईं थीं; किन्तु उन्होंने इनका उपयोग ही नहीं किया गया ।
    धर्मान्धोंद्वारा घोर सङ्कटकी स्थितिमें ‘कोरोना जिहाद’के माध्यमसे स्थितिको अनेक गुना भीषणतम किया गया है । नोट, रोटी, शाक, फलोंमें थूक लगाना हो या परिचारिकाओंसे अभद्रता, ‘जमात’, ‘जनाजे’, उपद्रव करना हो, ऐसी कुकृतियां कोरोना महामारीके सङ्क्रमण हेतु उत्प्रेरक ही सिद्ध हुई हैं । एक ‘वीडियो’ विगत वर्ष प्रसारित हुआ था, जिसमें एक ‘मौलाना’ कह रहा था कि ‘कोरोना’ कुरानसे निकला है और यह मुसलमानोंको हानि नहीं पंहुचाएगा ! सम्भवतः ऐसे ही किसी अन्धविश्वासका दण्ड ये भोग रहे हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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