मुख्यमन्त्री योगीपर आरोप मढने हेतु शवोंकी राजनीति : समाचार वाहिनियां २०१५ में गंगामें तैरते शवोंको कर रहीं साझा, प्रशासनने खोली पोल


१५ मई, २०२१
                 कुछ दिनों पूर्व देशकी अनेक समाचार वाहिनियोंने कुछ छायाचित्र साझा करते हुए समाचार दिया कि उत्तर प्रदेशके उन्नाव जनपदमें गंगा नदीमें कुछ शव रेतमें दबे देखे गए । इसके उपरान्त ऐसे अनेक वीभत्स छायाचित्र साझा होने लगे, जिनमें तैरते शवोंको चाटते कुत्ते, निकट बैठे गिद्ध, कौवे दृष्टिगत हो रहे थे ।
               उत्तर प्रदेशके रायबरेली जनपद प्रशासनने वहांके गेगासो गंगाघाटके ‘वाइरल’ दृश्यपटपर त्वरित विरोध प्रकटकर उसे भ्रामक बताया । ज्ञात हुआ कि गंगा घाटके यह छायाचित्र २०१५ के हैं ।
              इस असत्य समाचारको ‘एनडीटीवी’, ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’, ‘इंडिया टीवी’, ‘डीएनए’ और ‘जी न्यूज’ जैसी मुख्य समाचार वाहिनियोंने भी साझा किया ।
            यह सत्य है कि गत दिनों कुछ शव गंगा नदीमें दृष्टिगत हुए थे; परन्तु समाचार वाहिनियोंद्वारा सहस्रों शव तैरते दृष्टिगत होना तथा साझा किए सभी छायाचित्र पुरातन थे ।
     मुख्यमन्त्री योगीने आदेश दिया है कि कोई शव गंगा नदीमें न बहाए, उन्होंने ‘कोविड’से हुई मृत्युपर शवोंको शासनद्वारा गंगा घाटपर दाह संस्कार करवानेका भी आदेश दिया है । अतः शासनपर असत्य आरोप लगानेका यह कुटिल षड्यन्त्र प्रतीत होता है । देशकी प्रमुख समाचार वाहिनियोंका सत्यता प्रमाणित किए बिना ऐसे चित्र साझाकर भ्रामक समाचार प्रसारण हेतु दण्डित किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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