वीर सावरकरपर अपमानजनक लेखके लिए ‘द वीक’ने ५ वर्ष पश्चात क्षमा मांगी 


१६ मई, २०२१
“हम वीर सावरकरको अति सम्मानित श्रेणीमें रखते हैं । यदि इस लेखसे किसी व्यक्तिको कोई व्यक्तिगत चोट पहुंची है, तो पत्रिका प्रबन्धन खेद व्यक्त करता है और इस प्रकारके प्रकाशनके लिए क्षमा चाहते हैं ।”
‘द वीक’ पत्रिकाने शुक्रवार मई १४, २०२१को स्वतन्त्रता सेनानी वीर सावरकरके बारेमें पहले प्रकाशित एक अपमानजनक लेखके लिएके क्षमा मांगी है । विचाराधीन विवादास्पद लेख २४ जनवरी, २०१६ को केरल स्थित पत्रिकाद्वारा प्रकाशित किया गया था जिसे पत्रकार निरंजन टाकलेद्वारा लिखा गया था।
‘A lamb, lionised’ शीर्षकसे, लेखने पाठकोंको यह गलत धारणा दी कि वीर सावरकर एक ‘दब्बू’ मेमनाके बच्चे थे, जिनकी प्रतिष्ठाको केन्द्रमें भाजपा शासनद्वारा सिंहके कौशलसे मेल खानेके लिए किसी प्रकार ऊपर उठाया गया था । उल्लेखनीय है कि वीर सावरकरको उनकी क्रान्तिकारी गतिविधियोंके लिए २५-२५ वर्षके दो आजीवन कारावासोंका दण्ड सुनाया गया था । जब वे अंडमान और निकोबार द्वीप समूहके कारावासमें गए थे, तब उनकी आयु मात्र २८ वर्ष थी।
      यह यहांके राष्ट्रवादी हिन्दुओंकी ही शक्ति है कि ५ वर्ष उपरान्त पत्रिका अपने किसी लेखके लिए क्षमा मांग रही है । इस पत्रिकामें छपनेवाले समाचारोंका झुकाव वामपन्थकी ओर रहता है । इस पत्रिकाके प्रकाशनकी नींव भी भारतसे बाहर ब्रिटेन और अमेरिकामें पडी है; इसलिए इनको भारत और हिन्दुत्वसे भी समस्या रहती है । इनका यह खेद व्यक्त करना भी एक प्रकारसे हिन्दुत्वकी विजय ही है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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