गांवोंमें ‘आईसीयू’वाली रोगवाहिनी, चिकित्सालयोंमें ‘ऑक्सीजन प्लांट लगानेके इलाहाबाद उच्च न्यायालयके आदेशपर उच्चतम न्यायालयकी रोक


२२ मई, २०२१
    उच्चतम न्यायालयने इलाहाबाद उच्च न्यायालयके उस आदेशपर रोक लगा दी है, जिसमें उसने उत्तर प्रदेशमें स्वास्थ्य सुविधाओंको ‘रामभरोसे’ बताते हुए शासनको युद्ध स्तरपर चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध करानेका आदेश दिया था । उच्चतम न्यायालयने कहा कि उच्च न्यायालयको आदेश देते समय उसके क्रियान्वयनकी सम्भावनाओंके विषयमें भी विचार करना चाहिए था ।
     उच्चतम न्यायालयमें उत्तर प्रदेश शासनका पक्ष महाधिवक्ता तुषार मेहताने रखा और कहा कि इसे क्रियान्वित कर पाना कठिन है ।
   इलाहाबाद उच्च न्यायालयने ३० शैय्यावाले चिकित्सालयोंमें स्वयंका ‘ऑक्सीजन प्लांट’ लगानेका निर्देश दिया था । प्रत्येक गांवमें ‘आईसीयू’वाली २ रोगवाहिनियां (एम्बुलेंस) तुरन्त रखनेका कहा गया था ।
उलेखनीय है कि उत्तर प्रदेशमें प्रायः ९७ सहस्र ग्राम हैं और इनके लिए १ लाख ९४ सहस्र ‘एम्बुलेंस’, उनके लिए कमसे कम ५ लाख प्रशिक्षित वाहन चालक और इतने ही प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियोंकी आवश्यकता होगी, जिसे पूर्ण करना उत्तर प्रदेश तो क्या विश्वके किसी भी शासकके लिए तत्काल सम्भव नहीं है ।
      न्यायालयोंकी विवेकहीनताका यह एक और प्रमाण है । आश्चयर्जनक तो यह है कि ऐसे अक्षम और बुद्धिहीन लोग न्यायाधीश कैसे बन जाते हैं ? जो इस प्रकारका अव्यावहारिक निर्णय देते हैं ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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