अमेरिकी विशेषज्ञने की प्रधानमन्त्री मोदीकी प्रशंसा, ‘Alt News’के प्रतीक सिन्हाने किया उन्हें अपमानित करनेका प्रयास
२४ मई, २०२१
विपक्षी दलोंका बचाव करनेके लिए हास्यास्पद औचित्य और तुच्छ तर्क देनेके अतिरिक्त, ‘प्रोपेगेंडा आउटलेट’ ‘Alt News’ भारत और मोदी शासनके पक्षमें बोलनेवाले सभी लोगोंको अपमानित करनेका प्रयास करता है । कुछ दिवस पूर्व ‘Alt News’के संस्थापक, प्रतीक सिन्हाने एक विशेषज्ञको अपमानित करनेके लिए ‘ट्विटर’का आश्रय लिया ।
ज्ञातव्य है कि ‘अरब न्यूज’में प्रकाशित एक लेखमें, अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ डॉ. जॉन हल्समैनने तर्क दिया कि ‘कोविड-१९’ सङ्कटके पश्चात भी भारत सबसे बडा उभरता हुआ राष्ट्र बना हुआ है और इसमें निहित गुण उसे विश्वमें ‘सबसे शक्तिशाली’ राष्ट्र बननेमें सहायता करेंगे । हल्समैनने टिप्पणी करते हुए कहा कि मोदी शासन राजनीतिक रूपसे इस प्रकार सुरक्षित है कि अन्य विकासशील राष्ट्र मात्र ईर्ष्या कर सकते हैं ।
यद्यपि, सदैवकी भांति राष्ट्र और भारत शासनकी प्रशंसा ‘Alt News’के सह-संस्थापकको रुचिकर नहीं लगी । लेखककी विश्वसनीयतापर प्रश्न करते हुए सिन्हाने ‘ट्वीट’ किया कि अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञके ‘ट्विटर’पर मात्र १६० ‘फॉलोवर्स’ थे । ‘सोशल मीडिया’पर प्रसिद्धिका मापदण्ड ‘ट्विटर’पर बडी सङ्ख्यामें ‘फॉलोअर्स’ नहीं हो सकते है; क्योंकि कुछ स्व-घोषित ‘फैक्ट-चेकर्स’ जालस्थल उन्हें ‘क्लीन चिट’ देनेके लिए राजनीतिक दलोंके साथ मिलकर षड्यन्त्र रचते हैं । उनकी ‘ट्विटर फॉलोइंग’ किसी भी प्रकारसे उनकी विश्वसनीयताकी प्रतीक नहीं है ।
उल्लेखनीय है कि डॉ. हल्समैन एक सम्मानित विदेश नीति विशेषज्ञ और एक प्रमुख वैश्विक राजनीतिक सङ्कट परामर्श संस्था ‘जॉन सी. हल्समैन इंटरप्राइजेज’के अध्यक्ष और प्रबन्ध सहयोगी हैं । ‘हल्समैन बर्लिन’में ‘जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस’में ‘रेजिडेंट अल्फ्रेड वॉन ओपेनहेम स्कॉलर’ थे । वे लंदन नगरके समाचार पत्र ‘सिटी एएम’के वरिष्ठ स्तम्भकार भी हैं । हल्समैन इटलीके ‘एस्पेन इंस्टीट्यूट’में शोध पत्रोंमें भी योगदान देते हैं और ‘हेग सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज’में एक वरिष्ठ शोध ‘फेलो’ हैं ।
‘Alt News’ सदृश ‘न्यूज पोर्टल’ सदैव प्रयास करते हैं कि उनका प्रत्येक कृत्य भारत विरोधी ही हो और इसके लिए वे अपनी लज्जाहीनताकी सीमा पारकर सम्मानित व्यक्तियोंको अपमानित करनेसे भी पीछे नहीं हटते हैं । ऐसे ‘पोर्टल’ समाजपर कलङ्क हैं और इस कलङ्कको धोने हेतु सभी राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तियोंको ही आगे आना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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