पूर्णियामें हुई हिंसाके समय जिहादी भीडने कई महिलाओंका बलात्कार करनेका किया प्रयास 


२४ मई, २०२१
          बिहारके पूर्णियामें १५० से २०० की सङ्ख्यामें मुसलमानोंने अनुसूचित जातिकी ‘बस्ती’में जाकर उपद्रव किया । बच्चों तथा वयस्कोंको भी निर्दयतासे पीटा गया, बस्तीमें आग लगा दी, घरोंमें प्रवेश करके महिलाओंसे दुष्कर्म करनेके प्रयास किए । उनके घर जल गए हैं, वे खुले आकाशके नीचे भोजन पकानेको विवश हैं तथा भयग्रस्त हैं ।
      एक गर्भवती महिलासे धर्मान्ध इलियासने बलात्कारका प्रयास किया । एक आशा कार्यकर्ता, जो मुसलमानोंके घरोंमें अनेक बार प्रसव करवाने जा चुकी है, उसपर भी आक्रमण करके बलात्कारका प्रयास किया गया । उसने अर्धनग्न अवस्थामें भागकर अपने प्राणोंकी रक्षा की । मृतक मेवालालपर लाठी, फरसेसे आक्रमण किया गया था ।
         अनुसूचित जातिके लोगोंने बताया कि २४ अप्रैलको भी हिंसा हुई, जिसमें बिना जांचके ही उनके ही विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट किया गया । इससे पूर्व २०१५ में भी हिंसा हुई थी, जिसमें भी पुलिस निष्क्रिय रही थी ।
       यह क्षेत्र संवेदनशील इसलिए भी है कि ‘चिकन’स् नेक’ यहांसे मात्र ८ किलोमीटरपर है ।  गत दिनों शरजील इमामने इसे काटनेकी धमकी दी थी । उसे जहानाबादसे बन्दी बनाया गया था ।
      विश्व हिन्दू परिषदने मांग की है कि संगत धाराओंमें प्रकरण प्रविष्टकर अविलम्ब कार्यवाही की जाए । शासन व स्थानीय पुलिसकी उदासीनताको भी उन्होंने अतिशय चिन्तनीय बताया है ।
     जिस क्षेत्रमें यह हिंसा हुई है, वह ‘चिकन’स् नेक’के निकट होनेसे शङ्का उचित है कि यह भारतसे पूर्वोत्तरके भागको काटनेका कुटिल षड्यन्त्र हो । वहांके रहवासियोंमें भय उत्पन्नकर, उन्हें वहांसे भगानेका षड्यन्त्र हो सकता है; क्योंकि यही जिहादियोंकी वृत्ति है और यह एक प्रकारसे देशद्रोह है । इस घटनापर आरोपियोंको बन्दी बनाकर त्वरित जांच होनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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