‘किशमिश’ (भाग-३)


हृदयरोगमें : जलमें भीगी बीजरहित ‘किशमिश’का हलका मीठा जल रोगीको पिलानेसे उसे सांस लेनेमें लाभ होता है । मल त्यागनेमें और रक्तकी शुद्धिमें शीघ्र सहायता मिलती है । ३० दाने ‘किशमिश’ धोकर मिट्टीके बर्तनमें, एक कप जलमें डाल दें । इसमें थोडा केसर डाल दें । रातको इन सबको भिगो दें । पतले कपडेसे इस बर्तनका मुख बांधकर खुले स्थानपर रख दें । सवेरे पानी छानकर इसी ‘किशमिश’को अच्छी प्रकारसे चबाकर खाएं और यह पानी पीएं । इस प्रकार दस दिन सेवन करनेसे हृदयको बहुत शक्ति मिलती है ।
मस्तिष्कके लिए : हरी ‘किशमिश’के ४० दाने धोकर, सौ ग्राम ‘गुलाब’के ‘अर्क’में रात्रिभर भिगोए रखें । सवेरे ‘किशमिश’ निकालकर खा लें और ऊपरसे ‘गुलाब’के सत्त्वमें स्वादानुसार मीठा मिलाकर खाएं । इसे २१ दिनोंतक लें । इससे मस्तिष्ककी मांसपेशियोंको बल मिलता है ।
विद्यार्थियोंके लिए : ‘किशमिश’ अथवा ‘मुनक्का’ खानेसे मस्तिष्कको लाभ मिलता है, स्मरणशक्तिको बल प्राप्त होता है, मनोदशा सन्तुलित रहती है एवं इसे बुद्धिवर्धक माना गया है ।



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