केजरीवाल शासनको ३० जूनतक ‘राशन’ आपणियोंपर ‘ePoS’ यन्त्र लगानेकी केन्द्रने दी अन्तिम चेतावनी, विफल रहनेपर होगी कार्यवाही


२० जून, २०२१
      केन्द्र शासनने देहलीके केजरीवाल शासनपर अपनी राशनकी आपणियोंपर ‘इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल’ (ePoS) उपकरणोंको नहीं लगाने और ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ योजनाको लागू करनेमें विफल रहनेपर ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’का उल्लङ्घन करनेका आरोप लगाया है । खाद्य मन्त्रालयने गुरुवार, १७ जूनको एक पत्रमें राज्य शासनको ३० जूनतक ‘एनएफएसए’के अन्तर्गत कार्यवाही करनेका ‘अल्टीमेटम’ दिया है ।
यद्यपि, ऐसा करनेमें विफल रहनेपर क्या कार्यवाही की जाएगी ? यह नहीं बताया गया है । देहलीको ‘एनएफएसए’के अन्तर्गत लाभार्थियोंको वितरित करनेके लिए प्रत्येक माह ३६००० टन चावल और गेहूं मिलता है ।
कालान्तरमें मुख्यमन्त्री अरविंद केजरीवालने घर-घर ‘राशन’ पहुंचानेकी देहली शासनकी योजनाको रोकनेका आरोप केन्द्र शासनपर लगाया था । इसपर एक सप्ताह पूर्व केन्द्रीय मन्त्री रविशंकर प्रसादने अरविंद केजरीवालपर पलटवार करते हुए कहा था कि घर-घर ‘राशन’ पहुंचानेकी उनकी योजना एक ‘जुमला’ है ।
गत शुक्रवारको एक ‘प्रेस कांफ्रेंस’में रविशंकर प्रसादने केजरीवाल शासनको ‘राशन माफिया’के नियन्त्रणमें होनेका आरोप लगाया था । उन्होंने कहा था कि लोगोंके घरोंतक ‘सब्सिडी’वाला ‘राशन’ पहुंचानेका प्रस्ताव एक ‘प्रचार स्टंट’से अधिक कुछ नहीं है । इससे भ्रष्टाचारको बढावा मिलेगा ।
       केजरीवाल शासनद्वारा पारदर्शी ‘ePoS’के स्थानपर, अपारदर्शी रीतिसे खाद्यान्नका वितरण करना स्पष्ट रूपसे भ्रष्टाचारका एक उदाहरण है । वे इस व्यवस्थाको लागू न कर, किस वर्गको लाभ पहुंचाना चाहते थे ? ये वही जानते हैं; किन्तु केन्द्र शासनका निर्णय योग्य है एवं इसका पालन करवानेका दायित्व भी केन्द्रका ही है, जो वह करनेका प्रयास कर रहा है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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