२ माहमें १२ अपराधी ढेर: योगी शासनके मार्गपर असम शासन, पुलिसकी त्वरित कार्यवाहीसे विपक्ष क्रोधित


५ जुलाई, २०२१
     असममें १० मई को हिमंत बिस्वा सरमाका शासन आनेके ‘बाद’ वहां अपराधियोंके विरुद्ध पुलिस
कार्यवाही तीव्र हो गई है । मात्र दो माहके मध्य असम
में १२ अपराधी मारे गए हैं । इन मुठभेडोंपर ‘पुलिस’का कहना है कि उन्हें अपराधियोंने विवश किया, तभी उन्होंने गोली चलाई, जबकि विपक्ष पुलिसकी इस कार्रवाईको ‘क्रूर’ बता रहा है । उल्लेखनीय है कि इस प्रकरणपर विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंहने अपना व्यक्तव्य दिया था । उन्होंने बताया था कि राज्यमें विगत दो माहके मध्य भिडन्तमें एक दशकाधिक अपराधी मारे गए हैं । इनमें कर्बी आंगलोंग जनपदमें मारे गए अपराधियोंमें छह उग्रवादी संगठन ‘डीएनएलए’से जुडे थे । वहीं, दोका ‘यूपीआरएफ’से सम्बन्ध था । उन्होंने बताया कि धेमाजी, नलबाडी, शिवसागर और कार्बी आंगलोंग जनपदमें भिन्न-भिन्न भिडन्तोंमें ४ अन्य आरोपी मारे गए । कई अपराधियोंने कथित रूपसे पुलिस अधिकारियोंकी ‘सर्विस’ पिस्तौल छीन ली थी, जिसके पश्चात उनपर गोलियां चलानी पडी । उल्लेखनीय है कि असम ‘पुलिस’की ऐसी त्वरित कार्यवाहीके पश्चात उनकी तुलना उत्तर प्रदेश पुलिस और योगी शासनसे हो रही है । विपक्षका कहना है कि यदि अपराधी भागनेका प्रयास करते हैं तो यह पुलिसकी ढिलाई है ।
      हमारी जर्जर न्याय व्यवस्था एवं स्वतन्त्रताके पश्चात मुख्यतः तुष्टीकरणकी राजनीति करनेवाले दलोंके हाथ प्रशासनकी व्यवस्थाने राष्ट्रमें आतङ्कवाद, पृथकतावाद पनपनेका पूर्णरूपसे अवसर दिया; परिणामस्वरूप यह समस्या राष्ट्रके अधिकांश क्षेत्रोंमे गम्भीर रूपसे विकसित हुई । पहले उत्तर प्रदेशकी एवं वर्तमानमें असम प्रशासनने जिस प्रकार कार्यवाही की है, वह सराहनीय है और यही  समयकी मांग है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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