अन्तरधार्मिक विवाहमें बच्चे मुसलमान ही क्यों ? महिला हिन्दू क्यों नहीं रह सकती, किरण-आमिरके सम्बन्ध-विच्छेदपर अभिनेत्री कंगनाने उठाए प्रश्न
०६ जुलाई, २०२१
शनिवार, ३ जुलाई २०२१ को आमिर खान और किरण रावने भी वैवाहिक सम्बन्ध-विच्छेदकी घोषणा की थी, जिससे उनका १५ वर्षोंका ‘निकाह’ समाप्त हो गया । किरण राव आमिर खानकी दूसरी पत्नी थीं । इससे पहले रीना दत्तसे आमिर खानने विवाह किया था । १९८६ में हुआ यह विवाह २००२ में समाप्त हो गया था । इसके पश्चात २००५ में आमिर खानने किरण रावसे दूसरा विवाह किया था । आमिर खान और किरण रावने संयुक्त वक्तव्य भी जारी किया था और कहा था कि अब उन्होंने निर्णय लिया है कि अब वे जीवनके नूतन अध्यायका आरम्भ करेंगे; परन्तु पति-पत्नीके रूपमें नहीं ।
अभिनेत्री कंगनाने कहा कि आमिर खान ‘सर’के दूसरे सम्बन्ध-विच्छेदके साथ मैं आश्चर्य चकित हूं कि अन्तरधार्मिक विवाहके पश्चात बच्चा सदैव मुसलमान क्यों होता है ? क्यों एक महिला हिन्दू नहीं रह सकती है ? समयके साथ इस प्रथाको भी परिवर्तित होना चाहिए; क्योंकि यह प्रथा प्राचीन है और अविकासवादी है ।
चलचित्र उद्योगमें कंगना रनौत जैसे स्पष्टवादी और कटु सत्य बोलनेवाले कम ही लोग हैं, जिसके लिए वह अभिनन्दनकी पात्र हैं । भारतमें लव-जिहाद चलचित्र उद्योगसे ही आरम्भ हुआ है । निद्रस्त हिन्दू सिनेमामें आनन्दित था, वही सजग मुसलमान बडे सुनियोजित ढंगसे लव-जिहादकर हिन्दू युवाओंका मत-आरोपणकर (ब्रेनवॉश) भारतीय संस्कृतिको नष्ट कर रहा था । चलचित्र उद्योगमें सम्भवतः कोई ही ऐसा उदाहरण हो, जहां मुसलमान नायिकाने हिन्दू नायकसे विवाह किया हो; परन्तु इसके विपरित आपको शत-प्रतिशत उदाहरण मिल जाएंगे, जहां मुसलमान नायकने हिन्दू नायिकासे ही विवाह किया है । इन सभी बातोंसे कंगना रनौतका कथन उचित चरितार्थ होता है और इस बातसे इस सन्देहको और बल मिलता है कि आमिर खान जैसे लोग १५ वर्षमें ही क्यों सम्बन्ध विच्छेद कर देते हैं ? और क्यों अन्तरधार्मिक विवाहमें बच्चोंके नाम हिन्दू नहीं होते हैं ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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