सम्पूर्ण ओडिशामें नहीं हो सकती रथयात्रा, सर्वोच्च न्यायालयका निर्णय
०६ जुलाई, २०२१
उच्चतम न्यायालयने मङ्गलवारको ‘कोरोना’के चलते पुरी जगन्नाथ रथयात्राको छोडकर समूचे ओडीशाके मन्दिरोंमें रथयात्रा उत्सवको रोकनेके ओडिशा शासनके निर्णयको चुनौती देनेवाली विभिन्न व्यक्तियों तथा सङ्गठनोंद्वारा प्रचलित याचिकाओंको निरस्त कर दिया ।
याचिकाओंमें २३ जून, २०२१ के ओडिशा उच्च न्यायालयके आदेशके विरुद्ध याचिका थी, जिसमें राज्यके निर्णयमें हस्तक्षेप करनेसे अस्वीकार किया गया था । इसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय यह माननेमें विफल रहा कि रथ यात्रापर पूर्ण प्रतिबन्ध भारतके सन्विधानके अनुच्छेद २५ के अन्तर्गत नागरिकोंके धर्मके अधिकारके विरुद्ध होगा ।
ओडिशा उच्च न्यायालयने ‘कोरोना’ सङ्कटकी स्थितिपर विचार करते हुए कहा, “ये असाधारण समय है, जिसमें न मात्र ओडीसा; यद्यपि पूरा देश घातक ‘कोरोना’ सङ्कटकी द्वितीय लहरके सङ्कटसे उबर रहा है । ओडिशा राज्यद्वारा उठाए गए उपायों तथा सावधानियोंको उक्त सन्दर्भमें देखा जाना चाहिए ।”
भीड अधिक न रखकर भी तो आदिनाथ जगन्नाथकी रथयात्रा की जा सकती है; परन्तु नहीं न्यायालयोंको हिन्दुओंके प्रकरणमें यह विचार आता ही नहीं है, हां ईद होती तो अवश्य आता ! यहीं न्यायालय बादमें समानताकी बात करते हैं । यह द्विपक्षीय व्यवहार बताता है कि हिन्दू आज अपने ही देशमें द्वितीय श्रेणीका नागरिक हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
Leave a Reply