‘वेतन शासनका, सेवा आतङ्कियोंकी’के आरोप अन्तर्गत जम्मू कश्मीरके ११ कर्मचारियोंकी चाकरीसे किया बाहर


१० जुलाई, २०२१
       जम्मू कश्मीर प्रशासनके शीर्ष सूत्रोंकी सूचना अनुसार, जम्मू-कश्मीर शासनद्वारा ११ शासकीय कर्मचारियोंको आतङ्की समृबन्धोंके चलते चाकरीसे निष्कासित कर दिया गया है । जम्मू कश्मीरमें नामाङ्कित समितिने संविधानके अनुच्छेद- ३११(२) के अन्तर्गत अपनी दूसरी और चौथी बैठकमें ११ शासकीय कर्मचारियोंको उनकी सेवाको समाप्त करनेका सुझाव दिया है
। इसके लिए राष्ट्रीय विरोधी और आतङ्की गतिविधियोंमें इन कर्मचारियोंकी संलिप्तताका आधार बनाया गया है । समाचारके अनुसार, इन सेवा मुक्त कर्मचारियोंमेंसे एक ‘आईटीआई’ कुपवाडाका कर्मचारी है, जो ‘लश्कर-ए-तैयबा’को सुरक्षाबलोंके संचालनकी जानकारी साझा करता था । इसके अतिरिक्त अनंतनाग जनपदके २ शिक्षकोंको भी ‘जमात-ए-इस्लामी’ व ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’की कट्टरपन्थी विचारधाराको प्रसारित करनेका दोषी पाया गया है । वही ‘न्यूज १८’ के समाचारके अनुसार, ‘हिज्बुल मुजाहिदीन’के संस्थापक सैयद सलाहुद्दीनके पुत्रों सैयद अहमद शकील व शाहिद यूसुफको आतङ्की गतिविधियों हेतु धन प्रदान करानेका दोषी पाया गया है । उल्लेखनीय है कि ‘मीडिया’ प्रतिवेदनके अनुसार जम्मू-कश्मीर प्रशासनने केन्द्र शासित प्रदेश और राष्ट्रीय सुरक्षाको ध्यानमें रखते हुए संविधानद्वारा प्रदत्त प्रावधानोंका उपयोग करते हुए ही उक्त व्यक्तियोंको उनकी सेवासे मुक्त किया गया है ।
     विलम्बसे ही सही; परन्तु शासनने आतङ्कको प्रसारित करनेवाले इन ‘गुप्त आतङ्कियों’को सेवासे निष्कासितकर उचित निर्णय लिया है । भारतमें ऐसे अनेक ‘गुप्त आतङ्की’ शासनमें कार्यरत हैं, कारण है ‘सबका साथ, सबका विकास’ नहीं हो सकता है, यह केवल एक भ्रम है । इन सभीके पश्चात तो शासनको आतङ्कका धर्म समझमें आना चाहिए ।  – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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