उत्तर प्रदेशमें आतङ्की ‘मॉड्यूल’ हुआ उजागर
११ जुलाई, २०२१
उत्तर प्रदेशकी राजधानी लखनऊसे दो ‘अलकायदा’ आतङ्कियोंके बन्दी बनाए जानेके पश्चात भारतीय सुरक्षा ‘एजेंसियों’के लिए एक नवीन चुनौती खडी हो गई है । ऐसा माना जा रहा है कि ‘यूपीए’ कालमें भाग्यनगर (हैदराबाद), देहली व मुंबई जैसे जनपदोंमें हुए ‘बम’ विस्फोट करानेवाले आतङ्की अब पुनः सक्रिय हो गए हैं । इसमें चिन्ता करनेवाली बात यह है कि अब मात्र पाकिस्तानी आतङ्की सङ्गठन ही नहीं; अपितु ‘आईएसआईएस’ और ‘अलकायदा’से सम्बन्धित आतङ्की भी भारतमें कार्यरत हैं । इससे पूर्व सितम्बर २०२० में आतङ्कियोंपर ‘संयुक्त राष्ट्र’के प्रतिवेदनने भी भारतको सचेत किया था कि केरल व कर्नाटकमें अत्यधिक सङ्ख्यामें वैश्विक आतङ्की सङ्गठनके आतङ्की उपस्थित हैं तथा यह भी साझा किया था ‘आईएसआईएस’की भारतीय शाखा ‘हिन्दू विलायाह’के भी लगभग २०० आतङ्की सक्रिय हैं । वहीं गत माह पंजाबमें भी एक तस्करको बन्दी बनाया गया था जो पाकिस्तान, अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन स्थित आतङ्की सङ्गठनों और खालिस्तानी समर्थक तत्त्वोंसे सम्बन्धित था । आतङ्की इस उद्देश्यसे षड्यन्त्र कर रहे हैं कि वह भारतीय ‘रेलवे’को अपना लक्ष्य बनाएं; क्योंकि उसमें आजकल श्रमिक अधिक सङ्ख्यामें यात्रा कर रहे हैं । बन्दी बनाए गए आतङ्कियोंसें राम मन्दिर, काशी व मथुराका मानचित्र भी प्राप्त हुआ है, जिसे देखते हुए इन क्षेत्रोंमें ‘पुलिस’की अधिक सङ्ख्या में नियुक्ति की गई है । अब सुरक्षा ‘एजेंसियों’की ‘रेलवे’ व धार्मिक स्थलोंपर उत्पातका प्रयास करनेवाले ‘स्लीपर सेल्स’ तथा आतङ्कियोंकी सहायता करनेवाले लोगोंकी ‘पहचान’ करना प्राथमिकता होगी ।
समाचार सिद्ध करता है कि किस प्रकार षड्यन्त्रकर भारतमें आतङ्की ‘बम-विस्फोट’ आदिकी सिद्धता कर रहे है । यदि इन्हें समाप्त नहीं किया गया, तो ये ऐसे ही कुछ दिवस पश्चात पुनः खडे होंगे; अतः इनका मूल सहित नाश आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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