उदारवादियोंद्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघको ‘तालिबान’से प्रेरित बतानेपर भडके मुस्लमान कट्टरपन्थी
१९ जुलाई, २०२१
आतङ्की सङ्गठन ‘तालिबान’द्वारा भारतीय ‘फोटो जर्नलिस्ट’ दानिश सिद्दीकीकी मृत्युके पश्चात भारतके तथाकथित ‘उदारवादियों’ने इस इस्लामी आतङ्की सङ्गठन व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघके मध्य समानताएं बताना आरम्भ कर दिया है । कुछ समय पूर्व ‘कोरोना’ महामारीके कारण मृत्युको प्राप्त होनेवाले लोगोंकी चिताओंके छायाचित्र निकालनेके पश्चात उन्हें सार्वजनिक करनेवाले दानिश सिद्दकीकी मृत्युपर अब उनकी आलोचनासे व्यथित हिन्दू विरोधी, संघपर पत्रकारकी छवि धूमिल करनेका आरोप लगा रहे हैं । वहीं उदारवादियोंद्वारा संघकी तुलना ‘तालिबान’से होती देख इस्लामिक कट्टरपन्थी भी क्रोधित हो गए तथा ‘ट्विटर’पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए ‘तालिबान’की आलोचनाको ईशनिन्दा घोषित करने लगे हुए हैं । अनेक कट्टरपन्थी इससे सम्बन्धित ‘ट्वीट’ साझा कर रहे हैं । अब इसका परिणाम यह हुआ है कि उक्त छायाचित्र पत्रकारकी मृत्युको इस प्रकार दिखाया जा रहा है कि मानो वह प्राकृतिक है तथा इसमें इस्लामिक आतङ्कवादियोंकी कोई भूमिका नहीं है । इसी रणनीति अन्तर्गत मनीषा पांडे, आरफा खानम शेरवानी व रवीश कुमार जैसे कथित पत्रकार इसी मार्गपर चल रहे हैं । उनके विचारोंको पढकर ऐसा प्रतीत होता है, मानो वह कट्टरपन्थियोंसे अत्यधिक भयभीत हों व सत्य प्रस्तुत करनेमें असमर्थ ।
जो पत्रकार सत्यको प्रसारित करनेसे भयभीत होते हैं वह पत्रकारिता नहीं; अपितु चाटुकारिता करते हैं । वहीं भारतमें जिहादियोंकी शक्तिमें वृद्धिका कारण कहीं न कहीं कथित हिन्दुओंका समर्थन भी है । यह भारतको विनाशकी ओर ले जा रहा है । अब इसे हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे ही ठीक किया जा सकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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