५३ वर्ष पुराना विषय, सर्वोच्च न्यायालयमें याचिका स्वीकार होनेसे पूर्व ही संसार छोड गया १०८ वर्षीय व्यक्ति
२३ जुलाई, २०२१
देहलीमें सर्वोच्च न्यायालयमें १२ जुलाईको होनेवाली अपनी याचिकाकी सुनवाईसे पूर्व ही महाराष्ट्रके १०८ वर्षीय सोपान नरसिंगा गायकवाडकी मृत्यु हो गई है । भूमि विवादसे जुडा यह विषय १९६८ का है, जिसमें २०१५ में बॉम्बे न्यायालयने याचिका अस्वीकृत कर दी थी । इससे पूर्व २७ तक यह विषय न्यायालयमें लम्बित रहा । विधानानुसार अब उनके उत्तराधिकारी यह अभियोग लडेंगे । न्यायमूर्ति ‘डीवाई’ चंद्रचूड और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉयने इस विषयमें सूचना जारीकर दूसरे पक्षसे आठ सप्ताहमें उत्तर मांगा है ।
न्यायमूर्ति ‘डीवाई’ चंद्रचूड और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉयकी पीठने २३ अक्तूबर २०१५ और १३ फरवरी २०१९ को आए उच्च न्यायालयके निर्णयके विरुद्ध शीर्ष न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट करनेमें १४६७ दिनों और २६७ दिनोंकी देरीको क्षमा करनेके लिए प्रविष्ट आवेदनपर ‘नोटिस’ जारी किया है ।
यह है हमारी न्यायप्रणाली, जहां आज प्रसिद्ध व धनी व्यक्ति एक दिवसमें ही उच्चतम न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट कर सकता है; परन्तु साधारण व्यक्ति मरनेके पश्चात अवसर पाता है । ऐसी व्यवस्था किसीको क्या न्याय देगी ? यह व्यवस्थाके नामपर कलङ्क है । इसमें परिवर्तन अत्यन्त आवश्यक है, जो हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे ही सम्भव है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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