काशी विश्वनाथ मन्दिरको मिली ज्ञानवापी मस्जिदकी १७०० ‘फुट’ भूमि
२४ जुलाई, २०२१
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीके ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ काशी विश्वनाथ ‘कॉरिडोर’को भव्य बनानेके क्रममें मन्दिर प्रशासनको बडी सफलता मिली है । समाचार है कि काशी विश्वनाथ परिसरके ‘रेड जोन’में पडनेवाले १७०० ‘स्क्वायर फुट’की भूमिको मुसलमान पक्ष अंजुमन इंतेजामिया समितिने काशी विश्वनाथ ‘कॉरिडोर’के नाम कर दिया है । इसके स्थानपर उन्हें मन्दिर प्रशासनकी ओरसे १००० ‘स्क्वायर फुट’ भूमि मिली है । यह भूमि मन्दिरसे कुछ दूर बांसफाटक क्षेत्रमें है ।
अंजुमन इंतेजामिया समितिके सचिव सईद यासीनने ‘नवभारत टाइम्स’से वार्तामें स्पष्ट किया कि वह सुरक्षाको ध्यानमें रखकर यह भूमि मन्दिर प्रशासनके नामपर कर रहे हैं; परन्तु अन्य जो मस्जिदकी भूमि है, उसके लिए न्यायालयमें अपने पक्ष रखते रहेंगे । यासीन बताते हैं कि ख्रिस्ताब्द १९९३ से ही भूमिके इस भागपर प्रशासनका मुख्य नियन्त्रण कक्ष था । जहां ‘एसपी रैंक’के अधिकारी बैठते थे । प्रशासनकी ओरसे इसके स्थानपर कभी कोई धनराशि नहीं दी गई । उनके अनुसार, समितिने इस प्रतिज्ञापर भूमि प्रशासनको ‘लीज’पर दी थी कि जब भी यहांसे इस कार्यालयको हटाया जाएगा तो वह भूमि समितिको पुनः दे दी जाएगी; परन्तु अब इसे लिखित रूपसे मन्दिर प्रशासनके नाम कर दिया गया है ।
काशी विश्वनाथ मन्दिर और हिन्दूओंके लिए निश्चित रूपसे यह प्रसन्नताका विषय है कि अब मन्दिरका विस्तार होगा; परन्तु मुसलमान पक्षको भूमि देना यह दिखाता है कि शासन अभी भी ‘भाईचारे’वाले रंगमें है । पूर्वमें यह भूमि हिन्दूओंकी थी । जिसपर मुसलमान आक्रान्ताओंने बलपूर्वक षड्यन्त्र करके अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था । शासनके निर्णयको देख समझा जा सकता है कि क्यों आजका कोई भी राजनीतिक दल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापाना नहीं कर सकता है और इसके लिए निस्वार्थ वृत्तिवाले साधकोंको ही आगे आना होगा ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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