जहांसे इस्लाम आरम्भ, नारीवाद वहींपर समाप्त, भय और मृत्यु भला ‘चॉइस’ कैसे, नितिन गुप्तके (रिवाल्डोके) कठोर बोल
२४ जुलाई, २०२१
हिन्दू स्त्रियोंके साथ हो रहे बलपूर्वक धर्मान्तरणमें सबसे आश्चर्यजनक यह है कि इस प्रकरणपर नारीवादी मौन हैं; क्योंकि भारतमें नारीवाद वहींपर समाप्त हो जाता है, जहांसे इस्लामकी उत्पत्ति होती है । यह ‘तीन तलाक’, ‘निकाह’, ‘हलाला’पर मौन रहती हैं । तृप्ति देसाई सबरीमाला चली जाती हैं; परन्तु हाजी अलीमें नहीं घुसती हैं । जिस विषयका यह लोग भयसे बुराई नहीं कर पाते हैं, उसे यह ‘चॉइस’ कह देते हैं । ईरानमें सिर न ढकनेपर बन्दी बनानेका दण्ड है और इसे ‘चॉइस’ बोला जा रहा है । बलपूर्वक धर्मान्तरणको लेकर कहा जा रहा है कि स्त्रियां ‘निकाह’के पश्चात अपनी इच्छासे धर्म परिवर्तन करती हैं । कई प्रकरणोंमें तो ‘निकाह’ ही बलपूर्वक किया जाता है और परिवारको मारनेकी धमकी देकर धर्म परिवर्तन करवाया जाता है । इसे आप ‘चॉइस’ कहेंगे ? जब मनुष्यके पास अन्य विकल्प माता पिताकी मृत्यु होगी, तो वह क्या चुनेगा ? उसे ‘चॉइस’ नहीं कहते ।
जिस पन्थके प्रणेता ही स्त्रियोंके आत्मसम्मानके भक्षक हों, उनके अनुयायियोंसे क्या अपेक्षा करें ? केवल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे ही सर्वत्र उत्तम व आदर्श समाजकी आधारशिला सुदृढ होनेसे सभी सशक्त होंगे, जिससे भय व क्लेश प्रसारित करनेवाले पन्थोंका अस्तित्व स्वतः ही समाप्त हो जाएगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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