केरल उच्च न्यायालयने ईसाई व मुसलमानोंको आरक्षण देनेसे रोकनेवाली याचिका निरस्तकर हिन्दू संगठनोंपर लगाया अर्थदण्ड


२६ जुलाई, २०२१
           केरल उच्च न्यायालयने मुसलमान, ‘लैटिन कैथोलिक’, ईसाई नादर व अन्य अनुसूचित जातियोंको दिए गए आरक्षण और वित्तीय सहायतापर रोक लगानेवाली याचिकाको निरस्त कर दिया है तथा ‘हिन्दू सेवाकेन्द्रम एर्नाकुलम नॉर्थ’पर २५ सहस्रका अर्थदण्ड भी लगाया है । समाचारके अनुसार मुख्य न्यायाधीश मणि कुमार व न्यायमूर्ति शाजी पी चालीने यह कहते हुए याचिका निरस्त कर दी कि याचिकाकर्ताने इसे प्रविष्ट करने से पूर्व ठीक प्रकारसे ‘रिसर्च’ नहीं किया । न्यायालयने हिन्दू संगठनको राज्यमें दुर्लभ रोगोसे पीडित बच्चोंको वित्तीय सहायता प्रदान करनेवाले ‘बैंक’ ‌खातेमें यह राशि एक माहके भीतर जमा करनेका निर्देश दिया है तथा ‘डिफॉल्ट’की स्थितिमें राजस्व ‘वसूली’ अधिनियम १९६८ के अन्तर्गत कार्यवाही की भी चेतावनी दी है । वहीं याचिकाकर्ताने कहा कि मुसलमानों व ईसाइयोंके कुछ वर्गोंको शिक्षाके साथ-साथ चाकरीमें भी आरक्षण प्रदान किया जाता है तथा उन्हें सामाजिक और शैक्षिक रूपसे पिछडा माना जाता है, जबकि उनमें से अधिकांशतः सम्पन्न हैं । उन्होंने यह आरोप लगाया कि केरलमें सामाजिक और शैक्षणिक रूपसे पिछडे हिन्दुओंको अनेक समस्याएं हैं; अतः उनके हितार्थ हेतु यह याचिका प्रविष्ट की गई है । न्यायालयने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियमका संज्ञान लेते हुए कहा कि केन्द्र शासनने मात्र छह धार्मिक समुदायोंकों ही अल्पसंख्यक समुदायके रूप में मान्यता दी है ।
           समाचार चेतावनी देता है कि आनेवाले कालमें मुसलमान बहुल राज्योंमें हिन्दुओंकी स्थिति ऐसी ही होगी । यदि प्रत्येक प्रदेशको बंगाल व केरल बननेसे रोकना है तो संगठनकी शक्तिको लेकर, साधना मार्गपर धर्म प्रेमियोंको प्रशस्त होना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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