१३ वर्षके युवकसे बलात्कार और अप्राकृतिक यौनचार, उत्तर प्रदेशके ‘मदरसा’ शिक्षक मुफ्ती मुशर्रफको ११ वर्षका कारावास
०२ अगस्त, २०२१
कर्नाटकके तुमकुरु जनपदमें ६ वर्ष पूर्व अवयस्क युवकसे अप्राकृतिक यौनाचार करनेके दोषी पाए गए मुफ्ती मुशर्रफको बेंगलुरुके विशेष न्यायालयने ११ वर्ष कारावासका दण्ड सुनाया है । इसके अतिरिक्त, न्यायालयने ४२ वर्षीय ‘मदरसा’ शिक्षकपर ३०,००० सहस्र रुपएका दण्ड भी लगाया है ।
समाचारके अनुसार, उत्तर प्रदेशका रहनेवाला मुशर्रफ तुमकुरुमें अमलापुरके पास एक ‘मदरसे’में शिक्षक था । उसने १७ अप्रैल, २०१५ को ‘मदरसे’में एक अवयस्क युवकके साथ कुकर्म किया था । यह घटना तब सबके सामने आई, जब युवककी मां ‘मदरसे’में उससे मिलने गई । १३ वर्षीय बच्चेने उस समय अपनी मांको मुशर्रफके कुकृत्यके विषयमें बताया और उसे ‘मदरसे’से ले जानेके लिए कहा ।
इसके पश्चात भारतीय दण्ड संहिताकी धारा ३७७ (अप्राकृतिक यौन सम्बन्ध) और ५०६ के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया और मुशर्रफको बना लिया गया । उसके विरुद्ध ‘पॉक्सो’ विधानके अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया था । न्यायालयमें सुनवाईके समय ११ साक्षियोंने अपने वक्तव्य प्रविष्ट कराए थे । ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’के एक विवरणके अनुसार, विशेष लोक अभियोजक जीवी गायत्रीने कहा कि युवक और उसकी मांका वक्तव्य ‘मदरसा’के शिक्षकको दोषी सिद्ध करनेमें महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ ।
जिहादी मानसिकरूपसे कितने विक्षिप्त हैं ? यह उपर्युक्त समाचारसे ज्ञात होता है । जिस समुदायके लोग शिक्षकके रूपमें ऐसे कुकृत्य करते हैं, वह अपने समुदायकी युवापीढीको कैसी शिक्षा देते होंगे ? वह इन कुकृत्योंसे ज्ञात होता है । न्यायालयको चाहिए कि ऐसे लोगोंके दण्डपर पुनर्विचारकर इन्हें मृत्युदण्ड दिया जाए, यही इनके लिए उचित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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