ईसाई बने तो नहीं ले सकते ‘एससी’ वर्ग के लिए चलाई जा रही केन्द्रकी योजनाओंका लाभ
०५ अगस्त, २०२१
केन्द्र शासनने मंगलवार ३ अगस्त २०२१ को संसदमें एक प्रश्नका उत्तर देते हुए यह निर्णय लिया है कि कोई भी व्यक्ति जो हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्मसे अलग धर्मका अनुसरण करता है, उसे अनुसूचित जाति वर्गका नहीं माना जाएगा । शासनने कहा कि उनकी योजनाओंका उद्देश्य अनुसूचित जातिका कल्याण और विकास है । उनका लाभ धर्म परिवर्तित ईसाइयोंको नहीं दिया जा सकता ।
आंध्र प्रदेशमें ईसाई धर्म स्वीकारने वाले ८०% ‘एससी’ जानकारीके अनुसार, आंध्र प्रदेशमें ईसाई धर्ममें परिवर्तित होनेवाले ८०% लोग अनुसूचित जनजाति वर्गसे आते हैं और १९७७ के आदेशके अनुसार योजनाओंसे मिलनेवाले अनेक प्रकारके लाभ भी उठाते हैं । चाहे वह कोई आवास योजना हो, निशुल्क विद्युत व्यवस्था हो या ऋण लेना आदि । १९५० के राष्ट्रपतिके आदेशमें कहा गया है कि केवल हिन्दू, सिख और बौद्ध धर्मोंको माननेवालोंको ही हिन्दू माना जाएगा । यदि व्यक्ति उपर्युक्त धर्मोंका पालन करना बन्द कर देता है तो वह अनुसूचित जातिका नहीं रह जाता है और अनुसूचित जातिके लिए कोई लाभ उसे नहीं दिया जा सकता है ।
भारतके अनेक राज्योंमें हिन्दुओंको ईसाई लोग धर्म परिवर्तित करवाकर राज्यकी पिछडी जनजातियोंको मिलनेवाले लाभका उपयोग करवा रहे रहे हैं; अतः केन्द्र शासनका यह निर्णय योग्य है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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