पीतमपुरामें ‘नमाज’, ‘छावनी’में परिवर्तित किया गया क्षेत्र
०७ अगस्त, २०२१
बंगालसे उत्तर प्रदेश होते हुए मार्गोंको बाधितकर एवं बलपूर्वक ‘नमाज’ पढनेकी क्रिया देहलीतक पहुंच चुकी है । गत शुक्रवारको देहलीके पीतमपुरा क्षेत्रमें एक ऐसा ही प्रकरण उजागर हुआ, जिसपर स्थानीय लोगोंद्वारा भारी आपत्ति प्रकट की गई ।
इस घटनाका एक दृश्यपट ‘सोशल मीडिया’पर भी सार्वजनिक हुआ एवं ‘मीडिया’में भी इसे लेकर अधिक चर्चा हुई । शुक्रवार प्रातः ‘डू-पॉलिटिक्स’का समूह जब पीतमपुरा क्षेत्रमें पहुंची तो यह देखा कि ‘कॉलोनी’ ‘छावनी’में परिवर्तित की गई है । पीतमपुरा क्षेत्रके सम्बन्धित ‘ब्लॉक’को ‘बैरिकेडिंग’ लगाकर ‘सील’कर दिया गया एवं भारी मात्रामें स्थानीय पुलिस नियुक्तकर दी गई । क्षेत्रमें राज्यके बाहरसे लाए गए सुरक्षाबल भी नियुक्त थे ।
जब ‘डू-पॉलिटिक्स’के समूहने ‘कॉलोनी’के निकटके क्षेत्रोंके स्थानीय लोगोंसे चर्चा करनेका प्रयास किया तो यह सामने आया कि स्थानीय लोग भी घटनाको लेकर बोलनेसे बच रहे हैं । क्षेत्रके एक स्थानीय व्यक्तिने दृश्यपटमें वक्तव्य देनेसे मना कर दिया; परन्तु उन्होंने स्वयं सम्पूर्ण घटनाकी सूचना हमें दी । उन्होंने बताया कि लम्बे समयसे मुसलमान समुदायके लोग अधिक संख्यामें प्रत्येक शुक्रवारको एकत्रित होकर क्षेत्रमें ‘नमाज’ पढने आते थे ।
देहली पुलिस और प्रशासनका ऐसे गम्भीर घटनाओंमें इस प्रकारका वर्तन कोई नूतन बात नहीं है । गतवर्ष भी शाहीनबागमें इसी प्रकार प्रशासनकी असावधानी देखनेको मिली थी । कई माहतक शाहीनबागके स्थानीय समुदाय विशेषकी जनसंख्याने एक प्रमुख ‘हाईवे’को घेर रखा था, जिसपर प्रशासन पूर्णतः शान्त था और देहली पुलिस भी कुछ विशेष ध्यान नहीं दे रही थी । उनकेद्वारा इसी प्रकार तथ्यको टालनेका पूर्ण प्रयास किया जा रहा था जो आगे चलकर भीषण हिन्दू विरोधी उपद्रव बना ।
ये स्वयंको अल्पसंख्यक कहलानेवाले मुसलमान आज बहुसंख्यक हिन्दुओंपर भारी पड रहे हैं । पीतमपुरा और शाहीनबाग जैसे प्रकरण दर्शाते हैं कि मुसलमान केवल असहाय होनेका ढोंग करते हैं । पुलिस और प्रशासनका वर्तन देखकर प्रमाणित होता है कि अब हिन्दूको स्वयं ही अपने अस्तित्वकी रक्षा हेतु मुखर होकर स्वर उठाने होंगे; क्योंकि अन्य कोई पर्याय नहीं है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : डू पॉलिटिक्स
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