जिहादी बब्बू खानसे मिलकर आशाने की पति अर्जुनकी हत्या
०८ अगस्त,२०२१
२४ फरवरी २०२१ को गाजियाबादके साहिबाबाद ‘रेलवे स्टेशन’के समीप स्थित नालेमें मिले अज्ञात शवको लेकर नूतन सत्य उजागर हुआ है । ‘मीडिया रिपोर्ट्स’के अनुसार, लक्ष्मण यादवने थानेमें अपने मृतक भाई अर्जुनकी पत्नी आशा एवं साले रजनीश और भाईकी पत्नीके प्रेमी बब्बू खानके विरुद्ध हत्याका प्रकरण प्रविष्ट कराया था । इस प्रकरणमें नूतन मोड तब आया, जब मृतकके बच्चोंने परिजनको अपने मामा, मां और उसके प्रेमीके घृणित कृत्यके विषयमें बताया । बच्चोंने बताया कि उनकी मां ने उनके पिताजीको भोजनमें मूर्छित होनेकी (बेहोशी) औषधि मिलाकर दी थी, उसके पश्चात उनके मां, मामा और बब्बू खानने मिलकर चुन्नीसे गला घोंटकर हत्या कर दी । शवको साहिबाबाद स्थित नालेमें फेंककर तीनों भाग निकले । पुलिसको दिए परिवादमें लक्ष्मण यादवने बताया कि भाईका अभिज्ञान नहीं होनेपर ११ मार्चको अर्जुनकी पत्नी आशा अपने तीनों बच्चोंको लेकर बलिया जनपदके ग्राम टोला सिवान चली गई थी । इसके पश्चात आशा बच्चोंको छोडकर अपने भाई रजनीशके साथ घरसे चली गई । लक्ष्मण यादवने आगे बताया कि बच्चोंने बलिया स्थित घर पहुंचकर उन्हें २० फरवरीको अपने पिताकी हुई निर्मम हत्याका वृतान्त बताया ।
पुलिसने बताया कि महिलासे भी शवके विषयमें पूछताछ कराई गई थी; किन्तु उसने व उसके परिजनने शवका अभिज्ञान करनेपर अस्वीकृति व्यक्त की थी । इसके पश्चात ‘पुलिस’ने उस शवको अज्ञात मानकर उसका अन्तिम संस्कार किया था, जबकि २१ फरवरीको उस महिलाने ‘लिंक रोड’ थानेमें पतिके अज्ञात होनेकी ‘रिपोर्ट’ स्वयं प्रविष्ट कराई थी ।
धर्मविहीनता, व्यभिचार और जिहादियोंकी कुसङ्गतिके आवेशमें पडकर गृहस्थ जीवनमें अनेक प्रकारके क्लेश और घृणित अपराध हो रहे हैं, ऐसे प्रकरणोंमें भी वृद्धि हो रही है । ऐसी स्थितिका स्थायी समाधान सभीको बालकालसे ही सुसंस्कारित करना है; अतः सदगृहस्थीके रक्षणार्थ और संरक्षणके लिए हिन्दू राष्ट्रका स्थापित होना परम आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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