‘जन्नत’ प्राप्तिकी इच्छुक बालिकाने ‘मुहर्रम’में की आत्महत्या
२१ अगस्त, २०२१
मध्यप्रदेशके इंदौरमें २० अगस्त, ‘मुहर्रम’के दिवस एक अवयस्क १५ वर्षीय बालिकाने ‘फांसी’ लगाकर आत्महत्या की है । आत्महत्या करनेसे पूर्व उस बालिकाने अपनी मांसे पूछा था, ”क्या इमाम हुसैन आजही के दिवस हुतात्मा (शहीद) हुए थे ? क्या ‘आज’ जिन लोगोंकी मृत्यु होगी उन्हें ‘शहादत’ मिलेगी ? वह ‘जन्नत’में जाएंगे ?” इस प्रश्नके उत्तरमें मांने अपनी सहमति दी । इस मध्य उसकी मांको इसका आभास नहीं था कि उसकी पुत्री कुछ ही क्षण पश्चात ‘फांसी’ लगाकर आत्महत्या कर लेगी । परिवारके लोग उसे ‘फंदे’से उतारकर त्वरित चिकित्सालय ले गए, जहां उसके मृत घोषित कर दिया । यह घटना नगरके रावजी हाट क्षेत्रके चंपा बाग स्थित हाथीपालाकी बताई जा रही है ।
परिजनके अनुसार कुछ वर्ष पूर्व बालिका और उसकी सखी विद्यालयकी ओरसे ‘पिकनिक’ मनाने ‘राऊ सर्कल’के निकट नखराली धाणी गई थी, जहां उसकी सखीकी झूलेसे गिरकर मृत्यु हो गई थी । इसके पश्चातसे उनकी पुत्री आश्चर्यजनक विषयोंसे सम्बन्धित संवाद करती थी । वह सैदव कहती रहती थी कि ‘जीवन’ और ‘मृत्यु’ क्या है ? कोई किसी भी क्षण मृत हो सकता हैं । ऐसे विषयोंपर उसके अभिभावक उसे डांटते थे; किन्तु सखीकी मृत्युके पश्चातसे मानसिक रूपसे व्यथित रहने लगी थी ।
आधुनिक जीवनशैलीमें बाल्यकालसे ही मानसिक व भावनात्मक सन्तापोंके कारण आत्महत्याके प्रकरणोंमें सतत वृद्धि हो रही है । ऐसी अस्वस्थ मनोदशामें योग्य मनोउपचारसे भी केवल तत्त्कालिक लाभ ही प्राप्त होता है । केवल सनातन धर्मके अनुसरणसे ही जीवन्त दशामें ही परम मुक्ति साध्य है । अतः सभी अभिभावकोंने धर्माचरण व योग्य साधनाकर अपनी सन्तानोंमें सर्वश्रेष्ठ गुण अंकित करे । हिन्दू राष्ट्रमें सभीके धर्माचरणी होनेसे सर्व प्रकारके व सर्वक्षेत्रोंमें सन्तापोंमें स्वतः ही न्यूनता होगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
Leave a Reply