श्रेष्ठ मनुष्य


अधीत्येदं यथाशास्त्रं नरो जानाति सत्तम:।  धर्मोपदेशविश्यातं कार्याऽकार्याशुभाशुभम्।। – चाणक्य नीति

धर्म का उपदेश देनेवाले, कार्य-अकार्य, शुभ-अशुभ को बतानेवाले इस नीतिशास्त्र को पढ़कर जो सही रूप में इसे जानता है, वही श्रेष्ठ मनुष्य है।



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