प्रयागराजके उच्च न्यायालयने पुलिसकर्मियोंको दाढी रखनेका नहीं दिया अधिकार


२४ अगस्त, २०२१
    प्रयागराजके (इलाहाबादके) उच्च न्यायालयने पुलिसकर्मीको दाढी रखनेका अधिकार नहीं दिया । एक प्रकरणका निर्णय सुनाते हुए, उच्च न्यायालयने कहा कि पुलिसकर्मीद्वारा दाढी रखना अनुचित व्यवहार, दुराचार, कुकृत्य और अपराध है । उत्तर प्रदेशके सिपाही मोहम्मद फरमानने, एक वरिष्ठ अधिकारीद्वारा आदेश दिए जानेपर भी अपनी दाढी नहीं कटवाई । आज्ञा पालन नहीं करनेपर, उच्च अधिकारीद्वारा सिपाहीको निलम्बित कर दिया गया था । निलम्बनके उस आदेशको चुनौती देते हुए, उच्च न्यायालयमें याचिका प्रविष्ट करवाई थी; किन्तु उच्च न्यायालयने उसकी याचिकाको निरस्त करते हुए बताया कि इस आशयको अवगत करानेके पश्चात भी पुलिसकर्मी दाढी नहीं रख सकते; क्योंकि उच्च अधिकारियोंद्वारा दिए गए निर्देशोंका यह उल्लङ्घन है । भारतके संविधानमें अनुच्छेद-२५ के अनुसार दाढी रखनेको संरक्षित नहीं किया जा सकता है और यह अनुच्छेद इस सम्बन्धमें पूर्ण अधिकार प्रदान नहीं करता है । इसके अतिरिक्त ‘इस्लाम’में दाढीके केशोंको काटने और मुखपर केशोंको हटानेपर कोई रोक लगाई जानेके लिए, कोई विशिष्ट जनादेश नहीं है ।
     उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेशके बागपत जनपदमें भी बिना अनुमतिके दाढी रखनेपर, ‘एसआई’ इंसार अलीको पुलिस अधीक्षकने निलम्बित कर दिया था और दाढी कटवानेपर उसे पुनः चाकरीपर (नौकरीपर) रख लिया गया था ।
      ‘इस्लाम’की ‘आड’ लेकर, मुसलमान पुलिसकर्मी, सुरक्षाके क्षेत्रोंमें भी नियम भंग करना चाहते हैं । ऐसी जिहादी योजनाओंपर शासन तथा न्यायालयोंको सतर्कतासे अङ्कुश लगाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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