‘इस्लामी’ धर्मान्तरण, ‘मस्जिदों’का निर्माण, देहलीके उपद्रवियोंकी सहायता, सबके लिए वित्तपोषण (फंडिंग) करनेवाले समूहका उत्तर प्रदेशमें हुआ रहस्योद्घाटन
२६ अगस्त, २०२१
उत्तर प्रदेशमें सामूहिक धर्मान्तरणके प्रकरणमें वडोदरासे बन्दी बनाए गए आरोपित सलाउद्दीन जैनुद्दीन शेखको लेकर ‘पुलिस’ने अचम्भित करनेवाला सत्य उजागर किए हैं । शेखने सामाजिक सेवाके नामपर ‘अमेरिकन फेडरेशन ऑफ मुस्लिम्स ऑफ इन्डियन ओरिजिन’ (AFMI) के माध्यमसे गत ५ वर्षोंमें मिले प्राय: २४.४८ कोटि (करोड) धनराशिमेंसे १९.०३ कोटिकी धनराशि न्यासके ‘FCRA’ खातेमें आई थी; जबकि शेष धनराशि ‘हवाला’के माध्यमसे प्राप्त हुई थी । इस मध्य देहलीमें नागरिकता संशोधन अधिनियमके विरोधमें हुए दङ्गोंके आरोपितोंको वैधानिक सहायता उपलब्ध करानेके लिए ५९.९५ ‘लाख’ धनराशिका व्यय किया गया था; इसके अतिरिक्त, ५.९१ कोटि धनराशि मौलाना उमर गौतम और अन्य सहयोगियोंको, अमुसलमानोंके ‘इस्लामी’ धर्मान्तरण और गुजरात समेत अन्य राज्योंमें ‘मस्जिदों’के निर्माणके उद्देश्यसे दिए थे । यह कोष (फंड) उमर गौतमकी संस्था ‘इस्लामिक दावा सेंटर’को दिया गया था ।
ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेशमें १००० से अधिक लोगोंके सामूहिक ‘इस्लामी’ धर्मान्तरणका प्रकरण उजागर होनेके पश्चात ‘यूपी एटीएस’ने इस प्रकरणमें मुख्य आरोपी सलाउद्दीन और उमर गौतमको बन्दी बनाया था । इस प्रकरणमें ‘यूपी एटीएस’ अभीतक १० आरोपियोंको बन्दी बनाया जा चुका है ।
अलाभकारी संस्थाओंपर (NGO) वर्तमान केन्द्र शासनके नियन्त्रणके उपरान्त भी धर्मान्तरण करानेवाली संस्थाओंद्वारा विदेशोंसे धनराशि प्राप्त की जा रही है और उनपर तीक्ष्ण दृष्टि रखनेके कारण ही यह प्रकरण प्रकाशमें आया है, अन्यथा भूतकालमें ऐसी संस्थाओंने विदेशोंसे दान लेकर बडी संख्यामें धर्मान्तरण कराया है । केन्द्र शासनको चाहिए कि ऐसी सभी संस्थाओंपर और अधिक अंकुश लगाए ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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