बांकाके ‘एससी/एसटी’ क्षेत्रोंमें ३ वर्षमें दस सहस्र हिन्दू बना दिए गए ईसाई
२६ अगस्त, २०२१
बिहारमें ईसाई धर्मान्तरणमें निरन्तर होता विस्तार होता देखा जा रहा है । विशेष रूपसे, ग्रामीण क्षेत्रोंसे निर्धनोंको प्रलोभन देकर धर्मान्तरित करनेके प्रकरण सतत उजागर हो रहे हैं । विगतकाल में, गया और सारणसे इस प्रकारके प्रकरण उजागर हुए थे । एक दृश्यपट विवरणमें बताया गया कि कैसे हिन्दुओंको उनके धर्मग्रन्थोंके नामपर दिग्भ्रमितकर (बरगलाकर) ‘चर्च’ अपनी ओर आकर्षित करते हैं । अब एक विवरण सामने आया है, जिससे ज्ञात होता है कि बिहारके बांका जनपदके अनुसूचित जाति और जनजातिकी (SC/ST) बहुलतावाले जङ्गली-पहाडी क्षेत्रोंमें ईसाई धर्मका प्रचार-प्रसार प्रबलतासे हो रहा है।
बांकामें हो रहे धर्मान्तरणको लेकर, दैनिक जागरणने डॉ. राहुल कुमारका एक विस्तृत विवरण प्रकाशित किया है । इसमें बताया गया है कि गत दो-तीन वर्षोंके भीतर प्राय: दस सहस्र अनुसूचित जाति और जनजातिके लोगोंको ईसाई बनाया गया है । दुर्दशाग्रस्तसे आर्थिक स्थितिका लाभ उठाते हुए यह ‘चर्च’ धर्मान्तरण करवा रहे हैं।
विवरणमें बताया गया है कि जब गृहबन्दीमें (लॉकडाउनमें) लोगोंकी समस्याएं बढी तो यहां नलकूप (हैंडपम्प) लगाए जाने लगे और उन्हें ‘जीसस वेल’ कहा जाने लगा । लोगोंसे कहा गया कि नलकूपमें ‘जीसस’ प्रवेश कर गए हैं, जिससे यह जलका एक प्राकृतिक स्रोत बन जाएगा । साथ ही, निर्धनोंको यह बताया जा रहा है कि ‘जीसस’ ही वास्तविक भगवान हैं और जो परिवार ईसाई बन जाता है उसे ‘जीसस वेल’ और ‘बाल्टियां’ दी जाती हैं । ईसाई पन्थ स्वीकार करनेवाले परिवारके बच्चोंको शिक्षाके लिए ‘चर्च’ बुलाया जाता है, जहां उन्हें आवश्यक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जाती है; इसके अतिरिक्त इन परिवारोंकी लडकियोंके विवाहके लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है ।
ईसाई पन्थने भांति-भांतिके प्रलोभन देकर निर्धन और दुर्दशाग्रस्त लोगोंको अपने पन्थमें धर्मान्तरित करनेका ध्येय बना रखा है । ऐसेमें, शोषित और वञ्चित हिन्दुओंको अपने धर्मके प्रति जाग्रत करना, हिन्दूधर्मके अनुयायियोंका प्रमुख ध्येय होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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