समाचार उद्घोषकने कृषि विधानमें आपत्ति व्यक्त करनेका दिया अवसर, निरुत्तर व त्रस्त होकर टिकैतने दिया अनर्गल वक्तव्य और किया रुबिकापर व्यक्तिगत आक्षेप
२७ अगस्त, २०२१
८ माहसे कथित ‘किसानों’के साथ उपद्रवकर रहे स्वघोषित किसान नेता और ‘आन्दोलनजीवी’ राकेश टिकैत ‘एबीपी न्यूज’पर एक चर्चाके (डिबेटके) मध्य निरुत्तर हो गया, जब उनसे कृषि विधानमें समस्याओंसे सम्बन्धी प्रश्न पूछा गया । समाचार उद्घोषक रुबिका लियाकतने कृषि विधानोंकी प्रतियां लेकर टिकैतको विशेष अनुभागमें आपत्ति उजागर करनेका अवसर प्रदान किया, जिसके आधारपर उपद्रव हो रहा है । समाचार उद्घोषक उनसे निरन्तर यही प्रश्न करती रही, इसपर टिकैत निरुत्तर बैठ गया; तत्पश्चात निरर्थक वक्तव्यों व व्यक्तिगत आक्षेपोंसे ग्रसित प्रश्न समाचार उद्घोषकसे ही करने लग गया; अन्ततः कृषि विधानकी अनभिज्ञतासे टिकैतने त्रस्त होकर रुबिकापर केन्द्र शासनके लिए कार्यरत होनेका आरोप लगाया, जिसपर रुबिकाने प्रत्युत्तरमें कहा कि वह देशके नागरिक व पत्रकार होनेके अधिकारसे उनसे प्रश्न कर रही हैं ।
टिकैत दीर्घावधिसे (काफी समयसे) निरर्थक वक्तव्यों और धमकियोंको लेकर ‘मीडिया’में केन्द्र बिन्दु बना हुआ है; किन्तु अब स्थिति यह है कि टिकैतके वक्तव्य उपहासके विषय बन गए हैं ।
जिस तथाकथित आन्दोलनके आन्दोलनकर्ताओंकी धुरी ही असत्य, स्वार्थ, अरजातकता, राष्ट्रद्रोह व अपराधोंपर आधारित हो, उनका त्वरित ही केन्द्र शासनद्वारा नष्ट किया जाना अपेक्षित था, यह तो सर्वसामान्य राजधर्म है; किन्तु केन्द्र शासनद्वारा ऐसे उपद्रवियोंसे सामञ्जस्य स्थापित करनेकी कार्यशैली अपेक्षानुरूप ही सिद्ध हुई हैं । हिन्दू राष्ट्रमें सभीमें साधकत्त्व होनेसे सभी परमार्थकी दिशामें सतत कृतिशील रहेंगे; इसलिए निरर्थक व षड्यन्त्रकारी आन्दोलनोंकी आवश्यकता स्वतः ही समाप्त होगी; अतः हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनामें सभीका योगदान अवश्यम्भावी है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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