लिव-इन’में परस्पर सहमतिसे बनते हैं यौन-सम्बन्ध, दुष्कर्मके आरोपितको न्यायालयने दी प्रतिभूति


२९ अगस्त, २०२१
      मुंबईके न्यायालयके सामने एक विचित्र प्रकरण आया है । मुंबईमें ‘लिव-इन रिलेशनशिप’में रहनेवाले एक युगलने परस्पर सम्बन्धोंमें विवादको लेकर न्यायालयका द्वार खटखटाया है ।
      इस प्रकरणमें ‘लिव-इन रिलेशनशिप’में रहनेवाले पुरुषने महिलाके साथ विवाह करनेका वचन दिया था; इसके उपरान्त दोनों नवम्बर २०१८ से मई २०२० तक एक भाडेके घरमें ‘लिव-इन रिलेशनशिप’में रहने लगे, उसके पश्चात पुरुषने महिलासे विवाह करनेसे मना कर दिया एवं एक अन्य महिलासे विवाह कर लिया ।
      इस समूचे प्रकरणके पश्चात महिलाने पुरुषके विरुद्ध भारतीय दण्ड विधानकी धारा ३७६ (दुष्कर्म) एवं ३१३ (बिना सहमतिके गर्भपातमें) परिवाद प्रविष्टि किया था । महिला पक्षका कहना था कि प्राय: २ वर्षोंके इस ‘लिव-इन रिलेशनशिप’के मध्य महिलाने दो बार गर्भपात कराया था, जिसके कारण वह मानसिक रूपसे बहुत दबाव में आ गई थी ।
     जिस भारतीय संस्कृतिमें स्त्री-पुरुषके परस्पर सम्बन्ध मात्र वंश वृद्धिके लिए होते थे, आज हम उनपर वाद-विवाद कर रहे हैं कि दोनोंमें परस्पर सहमति थी या नहीं थी ? भारतीय संस्कृति ‘लिव इन रिलेशनशिप’को कभी भी स्वीकृति नहीं देती है । विगतमें भारतीय न्यायालयद्वारा इसे वैध ठहराना ही अपने आपमें विरोधाभास है और भारतीय संस्कृतिको कलङ्कित करनेका एक सुनियोजित षड्यन्त्र ही लगता है, जिसका विरोध किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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