अन्ना हजारेका प्रश्न, ‘मन्दिर बन्द क्यों, जब सारे ‘पब’ और ‘बार’ खुले हैं, मदिरालयोंपर लम्बी पंक्तियां क्यों ?


१ सितंबर, २०२१
      सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारेने महाराष्ट्र शासनकी दोहरी कार्यप्रणालीपर महाराष्ट्रकी महा विकास अघाडी शासनसे प्रश्न पूछा कि जब राज्यमें सारे ‘बार’ और ‘पब’ खुले हुए हैं, ऐसेमें मन्दिरोंको बन्द रखनेका क्या अर्थ है ? उन्होंने घोषणामें कहा कि यदि मन्दिरोंको बन्द रखे जानेके विरुद्ध आन्दोलन आरम्भ होता है, तो वो उसका समर्थन करेंगे ।
       अन्ना हजारेने महाराष्ट्र शासनका ध्यान मदिरालयोंके बाहर लग रही लम्बी पंक्तियोंकी और दिलाते हुए पूछा, “राज्य शासन मन्दिरोंको क्यों नहीं खोल रही है ? जनताके लिए मन्दिरोंको खोलनेमें शासनको क्या संकट दिखाई दे रहा है ?” कालान्तरमें कुछ लोगोंने अन्ना हजारेसे वार्ताकर उन्हें बताया कि कैसे मन्दिरोंके साथ उद्धव ठाकरे शासन भेदभाव कर रहा है ?
अन्ना हजारेने कहा यदि ‘कोरोना वायरस’ सङ्क्रमण दिशानिर्देश इसका कारण है, तो मदिरालयोंपर बडी भीड क्यों लग रही है ?
     भारतीय जनता दलने भी अपने प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रकान्त पाटिलके नेतृत्व में शंखनाद आन्दोलन प्रारम्भ किया है । मुंबई, पुणे, नासिक, सोलापुर और नागपुरके कई मन्दिरोंके सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि महा विकास अघाडी शासन गहरी निद्रामें सोया हुआ है; इसीलिए उसे जगानेके लिए शंखनाद आवश्यक है । विगत १५ महीनोंसे कई बार मन्दिरोंको खोलनेकी मांग की गई; परन्तु ठाकरे शासनने इसे अनसुना कर दिया ।
      यह वर्तमानके शासनकर्ताओंकी बुद्धिभ्रष्टताको दर्शाता है और कुछ नहीं ! धर्मस्थल बन्द; परन्तु मदिरालय इत्यादि खुले हुए हैं, ये लोग लोभवश अन्धे होकर केवल रुपएको ही अपना भगवान समझते हैं; अतः इनसे यह कुकर्म होना स्वाभाविक है । आगामी हिन्दू राष्ट्रमें धर्मनिष्ठ शासक होंगे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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