विश्वनाथ मन्दिरमें अहिन्दुओंका प्रवेश वर्जितवाला फलक


३ सिंतबर, २०२१
     उत्तराखंडके गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मन्दिरमें कालान्तरमें अन्नकूट मेला सम्पन्न हुआ है । अब इस मन्दिरके बाहर लगा एक सूचना फलक चर्चामें है । इसपर लिखा है, “मन्दिर परिसरमें अहिन्दू प्रवेश वर्जित है ।”
‘ईटीवी’ भारतकी सूचना अनुसार, अन्नकूट मेलेके समय मन्दिर आनेवाले हिन्दू मन्दिरमें आकर घण्टों बैठे रहते थे; परन्तु प्रसाद लेने और तिलक लगानेसे मना कर देते थे । इसे देखते हुए स्थानीय लोगोंने इनके बहिष्कारका निर्णय किया है ।
सूचनामें विश्व हिन्दू परिषदके जिलाध्यक्ष श्रीराम गोस्वामीजीद्वारा बताया गया है कि अहिन्दू, मन्दिरमें आनेवाली महिलाओं और लडकियोंपर व्यङ्ग्य करते थे । यहांतक कि हिन्दुओंकी भावनाको ठेस पहुंचानेके लिए शौचके पश्चात शीतल कुण्डमें हाथ धो लेते थे ।
उन्होंने यह भी बताया कि ‘गैर हिन्दुओं’के लिए मन्दिरके बाहर शीघ्र ही पेयजलकी व्यवस्था की जाएगी । साथ ही मन्दिरके बाहर ‘बोर्ड’ लगानेके लिए देवस्थानम ‘बोर्ड’से शीघ्र अनुमति लेनेकी बात भी उन्होंने कही है ।
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष मार्चमें उत्तराखंडके कई मन्दिरोंके बाहर फलक लगाकर अहिन्दुओंका प्रवेश प्रतिबन्धित होनेकी बात कही गई थी । हिन्दू युवा वाहिनीकी ओरसे राज्यके लगभग १५० मन्दिरोंके प्रवेश द्वारपर ऐसे फलक लगाए गए थे; परन्तु कुछ दिवस पश्चात इसको लेकर हिन्दू युवा वाहिनीके प्रदेश (उत्तराखंड) महासचिव जीतू रंधावाके विरुद्ध देहरादूनमें प्राथमिकी प्रविष्ट की गई थी । तब उन्होंने प्रशासनसे पूछा था, “वे मुसलमानोंका ऐसे पक्ष क्यों ले रहे हैं ? मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि उत्तराखंड जैसे स्थानपर ऐसा हो रहा है । मुझे अन्तर नहीं पडता कि वो मेरे विरुद्ध कोई परिवाद करें; परन्तु मैं सुनिश्चित करूंगा कि ऐसे  फलक उत्तराखंडके सभी मन्दिरोंके बाहर लगाए जाएं ।”
     हिन्दुओंका यह प्रयास सराहनीय है और इसी प्रकार जिहादियोंद्वारा किए जा रहे प्रत्येक कार्यपर हमें दृष्टि रखनी चाहिए; क्योंकि हिन्दू मन्दिरोंकी शुचिता और सात्त्विकताका ध्यान रखना हम हिन्दुओंका ही कर्तव्य है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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