* पांवोंके लिए : पांवोंके लिए भी केला खानेके लाभ देखे जा सकते हैं । पांवोंकी देखभालके लिए यहां केलेका छिलका महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है । पांवोंके लिए इसका प्रयोग ‘अस्ट्रिन्जन्ट’की भांति किया जाता है ।
प्रयोग : केलेका छिलका लें और उसे पांवों व एडियोंपर धीरे-धीरे रगडें । यह प्रक्रिया पांचसे दस मिनटतक प्रतिदिवस कर सकते हैं ।
* केशोंके विकासके लिए : केशोंके लिए भी केलेके लाभ बहुत हैं । ठीक पोषण न मिलनेके कारण केशोंका विकास रुक सकता है और वे समयसे पूर्व ही झड सकते हैं । ‘आयरन’ और ‘फैटी एसिड’की न्यूनताके कारण केश (बाल) झडनेकी समस्या हो सकती है । केला ‘आयरन’ और ‘फैटी एसिड’का एक अच्छा स्रोत है ।
* कोमल ‘रेशमी’ केशोंके लिए : एक पका हुआ केला और एक पका हुआ ‘एवोकाडो’ लें और दोनोंको साथमें मसलें । अब इसमें एक चम्मच जैतूनका तेल मिलाएं और उसे केशों एवं कपालपर (खोपडीपर) अच्छी प्रकारसे लगाएं । अब १५ मिनटके लिए केशोंको ढक दें । (चाहें, तो इसे रातभरके लिए भी केशोंपर लगा छोड सकते हैं ।) अब केशोंको ‘शैंपू’ कर लें ।
* ठोस केशोंके लिए : एक पका केला लें और उसमें दो-तीन चम्मच दही मिलाएं । अब इस लेपको अपने कपालपर (चोटीपर) अच्छी प्रकारसे लगाएं और १५ मिनट पश्चात ‘शैंपू’ कर लें ।
* सूखे केशोंके लिए : एक पके केलेके साथ तीन चम्मच मधु मिलाएं । इस मिश्रणको उसी प्रकार केशों और चोटीपर अच्छी प्रकारसे लगाएं और १५ मिनट पश्चात अच्छी प्रकार ‘शैंपू’से धो लें ।
* क्षतिग्रस्त केशोंके लिए : एक पके केलेमें आधा चम्मच बादामका तेल (बादाम रोगन) मिलाएं । अब इस मिश्रणको केशों और कपालपर लगाएं और १५ मिनट पश्चात ‘शैम्पू व कंडीशनर’से केशोंको धो लें ।
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