मुनव्वर रानाकी याचिका निरस्त, कभी भी बन्दी बनाया जा सकता है
३ सिंतबर, २०२१
मुनव्वर रानाद्वारा महर्षि वाल्मीकिको लेकर की गई विवादित टिप्पणीके प्रकरणमें प्रयागराज उच्च न्यायालयकी लखनऊ खण्डपीठने (बेंच) उनके विरुद्ध प्राथमिकीको निरस्त करने और प्रतिभूतिके आवेदनकी याचिकाको9 निरस्त कर दिया है । इस मध्य गुरुवार, २ अगस्त २०२१ को खण्डपीठके निर्णयके पश्चात ‘शायर’ अकस्मात अस्वस हो गया और उसे चिकित्सालयमें प्रविष्ट कराया गया है । इस प्रकरणमें मुनव्वर रानाके विरुद्ध अखिल भारतीय हिन्दू महासभा और सामाजिक सरोकार ‘फाउंडेशन’ने लखनऊके हजरतगंज थानेमें परिवाद प्रविष्ट कराया था । रानाके विरुद्ध ‘एससी/एसटी एक्ट’ समेत ‘आईपीसी’की धारा १५३-‘ए’, ५०१ (१) और २९५-‘ए’के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया था । इसके अतिरिक्त उनके विरुद्ध गत माह मध्य प्रदेशके गुना जनपदमें भी महर्षि वाल्मीकिको लेकर विवादित टिप्पणी करनेके प्रकरणमें प्राथमिकी प्रविष्ट की गई थी ।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिवस पूर्व ‘न्यूज नेशन’पर दीपक चौरसियाके साथ चर्चा करते हुए मुनव्वर रानाने महर्षि वाल्मीकिकी तुलना ‘तालिबान’से की थी व ‘तालिबान’के प्रति सहानुभूति व्यक्त की थी ।
१४० कोटि जनसंख्यावाले राष्ट्रमें एक राष्ट्रद्रोहीको दण्डित करनेके लिए सामान्यसा निर्णय न कर पा रही न्याय व्यवस्था, अपनी लचरताको दर्शा रही है । निधर्मी धर्मनिरपेक्ष प्रणालीके स्थानपर हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अब अपरिहार्य है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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