उत्तर प्रदेश अवैध धर्मान्तरण गुटके ८ सदस्योंपर भारत विरुद्ध युद्धके षड्यन्त्रका आरोप


५ सिंतबर, २०२१
     उत्तर प्रदेश पुलिसके आतङ्कवाद निरोधी दस्तेद्वारा हिन्दुओंके अवैध धर्मान्तरणमें सम्मिलित ८ व्यक्तियोंपर भारत विरुद्ध युद्धके षड्यन्त्र करनेका आरोप लगाया गया, जिसे लखनऊ न्यायालयने स्वीकार कर लिया है । ये आरोपी हैं, मोहम्मद उमर गौतम, मुफ्ती काजी, जहांगीर आलम काजमी, सलाउद्दीन शेख, इरफान शेख, डॉक्टर फराज, प्रसाद रामेश्वर कावारे अब नाम आदम, अरसलान तथा कौसर आलम ।
       इन्होंने अनेक हिन्दू विकलांग बच्चों, महिलाओं, निर्धनोंको उचित शिक्षा, चाकरी, विवाह जैसे प्रलोभन देकर उनका धर्मान्तरण करवाया, जिसके लिए इन्हें विदेशोंसे अवैध धन प्राप्त हुआ था; इसलिए इनके विरुद्ध धारा १२१ अ तथा १२३ के अन्तर्गत परिवाद प्रविष्ट किया गया ।
     २ जून २०२१ को जब रमजान व कासिफ डासना मन्दिरके महन्त स्वामी यति नरसिंहानंद सरस्वतीकी हत्या करनेके उद्देश्यसे मन्दिर परिसरमें प्रवेश कर गए, तो उन्हें वहां उपस्थित भक्तोंने पकडकर पुलिसको सौंप दिया । उत्तर प्रदेश ‘एटीएस’ने जब इनके मुख्य आरोपी मोहम्मद उमरको बन्दी बनाया तो ज्ञात हुआ कि ‘इस्लामिक दावा सेन्टर’के नामसे इनकी एक संस्था अबतक लगभग १००० हिन्दुओंका धर्मान्तरण करवा चुकी है । इन्हें इस कार्य हेतु गत ५ वर्षोंमें चन्देके रूपमें ६० करोड रुपये प्राप्त हुए हैं, जिनमें विदेशसे १९ करोड प्राप्त हुए हैं । ये लोग देशके ५ राज्योंमें १०३ मस्जिदोंका निर्माणभी करवा चुके हैं । इनके विरुद्ध धर्मपरिवर्तनकी प्रक्रिया करनेके कारण धारा ४१९, ४२०, २९५ अ, ५०५ तथा ५०६ में भी परिवाद प्रविष्ट किया गया है तथा देशद्रोहकी धाराएं १२१ तथा १२३ भी लगाई गई हैं ।
        सऊदी अरब तथा ‘यूके’से इन्हें ‘हवाला’के द्वारा अवैध धन प्राप्त होता था, जिससे ये लोग विकलांगों, महिलाओं, निर्धनोंको प्रलोभन देकर धर्मान्तरण करवाते थे । ईसाई ‘मिशनरीज’के समान इनका धर्मान्तरणका व्यापार भी सभी राज्योंमें चल रहा था ।
       भारत शासन यदि इसी गतिसे कार्य करता रहा, तो धर्मान्तरणकी गतिविधियां बन्द होनेमें सम्भवतः अनेक वर्ष लग जाएंगे । धर्मान्तरण एक संक्रामक रोग है, जिसे यथाशीघ्र नहीं रोका गया तो ये शीघ्र ही नवीन नवीन जडें बनाते जाएंगे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : डू पॉलिटिक्स


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