‘Unacademy’के शिक्षकद्वारा’तालिबान’ आतङ्कियोंके साथ हुतात्मा भगतसिंहकी तुलना करनेपर विरोध
५ सिंतबर, २०२१
‘Unacademy’के शिक्षक अनिल खन्नाने हुतात्मा भगत सिंहकी तुलना ‘तालिबान’से करते हुए एक चलचित्रमें कहा है कि ‘तालिबान’को हम सभी अपशब्द कहते हैं; परन्तु देखा जाए हम भारतीय क्या कर रहे थे, जब ब्रिटिश यहां थे ? भगत सिंह क्या कर रहे थे ? वे मेरे ‘हीरो’ हैं । वे भी यही कर रहे थे, जो ‘तालिबान’ कर रहा है ।
व्याख्यानमें उन्होंने ‘तालिबान’का महिमामण्डन किया है । इस तुलनाने भगत सिंहके प्रशंसकोंकी भावनाओंको भडकानेके साथ ही इस्लामी आतङ्कियोंद्वारा की गई यातनाओंको पुनर्जीवित करनेका कार्य भी किया है ।
यद्यपि इस चलचित्रके उजागर होनेपर अनिल खन्नाने एक दूसरा चलचित्र प्रसारितकर इसपर क्षोभ भी प्रकट किया और यह कहते हुए क्षमा भी मांगी कि ‘तालिबान’की तुलना हमारे स्वतन्त्रताके नायकोंसे नहीं की जा सकती । अनिल खन्नाने कहा कि यह मात्र एक वार्ताके मध्य किया गया वार्तालाप था; परन्तु वे इसे लेकर क्षमा प्रार्थी हैं ।
इस तुलनाने भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारी वीरके अदम्य साहसपर प्रश्नचिह्न भी खडे कर दिए हैं । इसके पश्चात सामाजिक अन्तर्जालपर इसको लेकर विरोधस्वरूप लोग पूछ रहे हैं कि हुतात्मा भगत सिंहने कितनी हत्याएं, बलात्कार और आतङ्की आक्रमण किए थे । लोग प्रश्न उठा रहे हैं कि जब शिक्षा देनेवाले लोग ऐसी मानसिकताके होंगे तो देशके बच्चे ऐसी ही बातें सीखेंगे ।
केवल यही नहीं कांग्रेस शासनद्वारा अपने कार्यकालमें देहली विश्वविद्यालयकी इतिहासकी ‘इंडियाज स्ट्रगल फार इंडिपेंडेंस’के नामसे प्रकाशित पुस्तकमें राष्ट्रकी स्वतत्रताके लिए प्राण न्योछावर करनेवाले महान देशभक्तोंके कृत्योंको आतङ्की घटनाके रूपमें दर्शाया गया था । इस पुस्तकके प्रकाशनमें सम्मिलित सभी लोग कांग्रेसके कार्यकालमें विभिन्न शिक्षण संस्थाओंमें निदेशक और अध्यक्ष पदोंपर नियुक्त रहे थे । इनकेद्वारा ऐसी अनेक झूठी और मनगढन्त कहानियोंको इतिहास बताकर पुस्तकों और पाठ्यक्रममें सम्मिलित किया गया था, जिसे आजकी पीढी सत्य मान लेती है ।
उपर्युक्त घटनासे हमें ज्ञात होता है कि आज के शिक्षकोंकी बुद्धि इतना भी भेद नहीं कर पाती है कि हुतात्मा भगत सिंहद्वारा किए गए कार्योंके पीछे उसका देशप्रेम था; परन्तु ‘तालिबान’द्वारा किए गए नरसंहारके पीछे उनका स्वार्थ एवं उनकी आसुरी वृत्ति छुपी हुई है । यह सब अच्छे संस्कार निर्माण और उचित शिक्षा पद्धति न होनेका ही परिणाम है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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