केला (भाग – १३)


* पके हुए केलेको काटकर, शक्करके साथ मिलाकर बर्तनमें बन्द करके रख दें । इसके पश्चात इस बर्तनको उष्ण जलमें डालकर ‘गर्म’ करें । इस प्रकार बनाए गए पदार्थके पेयसे (शर्बतसे), खांसीकी समस्या न्यून हो जाती है ।

* जिह्वापर छाले हो जानेकी स्थि‍तिमें गायके दूधसे बने दहीके साथ केलेका सेवन करना लाभदायक होता है । इससे छाले ठीक हो जाते हैं ।

* ‘दमे’के (सांस फूलनेके) रोगमें भी केलेका प्रयोग बहुत लाभकारी होता है । गांवोंके लोग इसके लिए केलेको छिलके सहित सीधा या खडा काटकर, उसमें नमक व काली मिर्च लगाकर रातभर चांदनीमें रखते हैं और प्रातःकाल इस केलेको अग्निपर भूनकर रोगीको खि‍लाते हैं । ऐसा करनेसे ‘दमे’के (सांस फूलनेके) रोगीको लाभ प्राप्त होता है ।

* चोट या खरोंच आनेपर केलेका छिलका उस स्थानपर बांधनेसे ‘सूजन’ नहीं होती । इसके नियमित सेवनसे आंतोंकी ‘सूजन’ भी समाप्त हो जाती है ।

* शरीरके किसी भी अङ्गके अग्निसे जलनेपर, केलेके गूदेको लेपकी भांति लगानेसे शीघ्र लाभ होता है ।

* केलेके गूदेको मधुके साथ मुखपर लगानेसे त्वचाकी झुर्रियां समाप्त हो सकती हैं । इसके प्रयोगसे मुखपर प्राकृतिक चमक भी आती है ।

* महिलाओंमें श्वेत प्रदरकी समस्या होनेपर, नियमित रूपसे दो पके केलोंका सेवन करना बहुत लाभदायक होता है । प्रतिदिन एक केला, लगभग ५ ग्राम शुद्ध देसी घीके साथ प्रातः एवं सायं, खानेसे भी प्रदररोग दूर होता है ।



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