सरसोंका नाम लेते ही मनमें सर्वप्रथम सरसोंका साग आता है । सरसोंका उपयोग अधिकतर तेल निकालनेके लिए ही किया जाता है । इसके अतिरिक्त, भारतीय पाकशालामें (रसोईमें) सरसोंके दानेसे छोंक (तडका) भी लगाया जाता है । स्वास्थ्यके लिए भी इसके कई लाभ हैं । स्वास्थ्य लाभके लिए ही हम सरसोंके बीजोंका उपयोग करते हैं ।
सरसों ‘क्रूसिफेरा’ या ‘ब्रैसिकेसी’ परिवारका एक पौधा है, जो आकारमें लगभग २ से ३ ‘फुट’तक ऊंचा हो सकता है । इसे ‘ब्रेसिका कैंपेस्ट्रिस’ वैज्ञानिक नामसे जाना जाता है । इसकी पत्तियोंका उपयोग साग बनानेके लिए, जबकि पुष्पों और बीजोंका उपयोग, तेल निकालनेके लिए किया जाता है । इसके अतिरिक्त, सरसोंके बीजोंका उपयोग मसालेके रूपमें भी किया जाता है ।
सरसोंके प्रकार : सरसोंके मुख्य रूपसे तीन प्रकार होते हैं, काली सरसों, पीली सरसों और भूरी सरसों । सरसोंसे ही मिलती-जुलती राई होती है । राईके कण सरसोंके बीजकणोंसे आकारमें थोडे छोटे होते हैं, इसके साथ ही स्वाद भी दोनोंका पृथक-पृथक होते हैं । जहां, सरसोंके बीजकणोंका तेल निकाला जाता है, वहीं राईके कण (दाने) अचारमें डाले जाते हैं । यदि गुणोंकी बात की जाए, तो दोनोंमें ही लगभग एक समान गुण और पोषक तत्त्व पाए जाते हैं । इसके साथ ही, आंग्ल (अंग्रेजी) भाषामें दोनोंको ‘मस्टर्ड’ कहा जाता है, इसीकारणसे आंग्ल भाषाई लोग इनमें भेद नहीं कर पाते ।
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