श्रीकृष्ण जन्मस्थल क्षेत्रको घोषित किया गया तीर्थस्थल, मद्य-मांसका विक्रय हुआ निषेध
११ सिंतबर, २०२१
उत्तर प्रदेशके योगी शासनने मथुरा-वृंदावनमें कृष्ण जन्मस्थलके १० वर्ग ‘किलोमीटर’की परिधिको तीर्थस्थल घोषित कर दिया है । इस क्षेत्रमें मद्य एवं मांसका विक्रय नहीं होगा । मुख्यमन्त्री कार्यालयकी ओरसे दिए गए, एक आधिकारिक वक्तव्यमें यह बताया गया है । उन्होंने कहा कि सम्बन्धित अधिकारियोंको प्रतिबन्धकी योजना बनानेके साथ-साथ, इस प्रकारकी गतिविधियोंमें सम्मिलित लोगोंको किसी अन्य व्यवसाय अथवा दूध विक्रय करना आरम्भ करनेकी प्रेरणा दे सकते हैं । मथुरा, प्रचुर मात्रामें दुग्धका उत्पादन करनेवाला क्षेत्रके रूपमें जाना जाता था । पूर्वके मुख्यमन्त्री, विधायक एवं राजनेता, मथुरा-अयोध्याका नाम लेनेसे भयभीत रहते थे, हिन्दू पर्वोंपर बधाई देनेसे घबराते थे, विद्युत-पानी एवं सुरक्षा भी नहीं दी जाती थी, हर्षोल्लासपर भी प्रतिबन्ध लगे हुए थे, त्योहार मनानेके लिए समयकी सीमाएं थीं, हिन्दुओंके पर्वोंमें कोई भी उच्च पदाधिकारी सहयोग नहीं देते थे; किन्तु अब कान्हाका जन्मोत्सव धूमधामसे अर्धरात्रिमें ही मनाया जाता है । मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथने बताया कि स्वतन्त्रताके पश्चात रामनाथ कोविंद प्रथम राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने अयोध्या जाकर रामललाके दर्शन किए । इससे पूर्वके शासक, लोगोंको पूजा करनेमें भी साम्प्रदायिकताका भय दिखाते थे ।
योगी आदित्यनाथने जन्मभूमिके लिए एक प्रशंसनीय पग उठाया है; किन्तु धर्मस्थलके लिए केवल दस ‘किलोमीटर’की ही परिधि बहुत न्यून है यह अधर्म पूरे मथुरा नगरीमें बन्द होना चाहिए । जो अधर्मी नेता पूर्वमें मन्दिर जानेमें सङ्कोच करते थे, अब वे ही कहते हुए नहीं थकते कि राम एवं कृष्ण हमारे हृदयमें हैं । हिन्दुओंको एकत्रित होकर, अनर्थ करनेवाले नेताओंको सदाके लिए उखाड फेंकना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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