भगवान श्रीगणेशके हाथोंमें ‘सेनेटरी नैपकिन्स’ थमानेवाले ‘NGO’के विरुद्ध हिन्दू महिलाएं
१४ सितम्बर, २०२१
मध्य प्रदेशके इंदौरमें स्थित महू (डॉक्टर आंबेडकर नगर) नगरमें गणेश चतुर्थी दिवसपर अनिवार्य नामक ‘एनजीओ’ने भगवान गणेश महाराजकी प्रतिमाके हाथमें ‘सेनेटरी नैपकिन’ थमा दिए गए, जिसके पश्चात लोग क्रोधित हो गए एवं इस प्रकार हिन्दू त्योहारों व देवी-देवताओंके साथ छेडछाड किए जानेपर आपत्ति जताई ।
‘एनजीओ’के संस्थापक एवं युवा लेखक अंकित बागडीने कहा कि ‘बाहुबली’ चलचित्रकी सफलताके पश्चात बप्पाको बाहुबलीकी वेशभूषामें दिखाया गया था, तभी उन्हें ये विचार आया कि क्यों न गणेश चतुर्थीके माध्यमसे ‘मासिक धर्म’को लेकर जागरूकता फैलाई जाए ।
उन्होंने कहा कि अब जब हम स्वतन्त्रताका अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो क्यों न महिलाओंकी स्वतन्त्रताके लिए इस प्रकारके क्रियाकलाप किए जाएं ।
अन्तर्जाल स्थलपर विरोध प्रविष्ट करते हुए सुमित गुप्तने पूछा कि विज्ञापन करनेके लिए ये किस प्रकारकी धृष्टता है ? वहीं, एक अन्य उपयोगकर्ताने लिखा कि ये उचित माध्यम नहीं है । एक उपयोगकर्ताने लिखा, “क्या हम भगवानको केवल भगवान नहीं रहने दे सकते ? जागृति खन्नाने इसे मूढता बताते हुए कहा कि जाग्रति फैलानेके अन्य भी कई माध्यम हैं ।
नारी शक्तिका अपनी धर्म रक्षा हेतु मुखर होकर विरोध करना, प्रशंसा योग्य है । उपर्युक्त घटनासे हमें ज्ञात होता है कि आजके पढे लिखे भ्रष्ट बुद्धिजीवियोंका विवेक धर्मके प्रति कुम्भकरणकी भांति सोया हुआ है और धर्मशिक्षणके अभावमें वे मूढता कर रहे हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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