प्राचीन महादेवम्मा मन्दिर विध्वंसकी घटनापर ‘विहिप’का आक्रोश, ‘डीसी’ और ‘तहसीलदार’के विरुद्ध कार्यवाहीकी मांग
१७ सितम्बर, २०२१
गुरुवार १६ सितम्बर २०२१ को मैसूरके नंजनगुडु उपखण्डके उचगनीमें २०० वर्ष पूर्व प्रतिष्ठित महादेवम्मा मन्दिरको स्थानीय प्रशासनने प्रातःके समय ध्वस्त कर दिया । इस मन्दिरका इतिहास ५०० वर्ष पुरातन था । मन्दिर नगरके मुख्यमार्गसे ४० फुटकी दूरीपर स्थित था; अतः इससे नगरके विकासपर कोई प्रभाव पडना सम्भव नहीं था ।
‘विहिप’ नेताने मुख्य पुलिस अधीक्षकको पत्र लिखकर कहा है कि ऐसाकर, सर्वोच्च न्यायालयके आदेशकी अवहेलना की गई है, जिसमें स्पष्ट है कि धार्मिक संरचनाएं तोडने अथवा स्थानान्तरित करनेसे पूर्व स्थानीयजनसे चर्चाकर सर्वसम्मतिसे कोई उचित निर्णय लिया जाना चाहिए था । इसे ‘तहसीलदार’की विधान विरुद्ध कार्यवाही बताते हुए, उनके विरुद्ध प्रशासनिक कार्यवाहीकी मांग की है । उनके निर्णयसे हिन्दू जनमानसकी धार्मिक भावनाओंको ठेस पहुंची है ।
हिन्दुओंके विशाल जनसमुदायने मन्दिर विध्वंस किए जानेके विरुद्ध सहस्रोंकी सङ्ख्यामें एकत्रित होकर प्रदर्शन किया ।
कर्नाटक प्रदेशकी यह घटना दुःखद है । प्राणप्रतिष्ठित किसी पुरातन मन्दिरका विध्वंस असहनीय है । आंध्रमें कट्टरपन्थियोंके कारण ऐसी अनेक घटनाएं होती हैं । कर्नाटकमें इसकी पुनरावृत्ति, वह भी प्रशासनिक अधिकारियोंद्वारा, अतिशय निन्दनीय है । हिन्दू समाजको इन घटनाओंपर निरन्तर रोष प्रकटकर इन्हें रोकना होगा । सम्बन्धित अधिकारियोंको इस अपराधपर कठोर दण्ड दिया जाए, तभी ऐसी घटनाओंकी पुनरावृत्ति रूकेगी । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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