अब ‘कन्यादान’को कलङ्कित करनेमें जुटा ‘बॉलीवुड’, आलिया भट्टके दृश्यपटपर लोगोंने पूछा, “हलाला और तीन तलाकपर मौन क्यों ?”
१९ सितम्बर, २०२१
वस्त्रोंके ‘ब्रैंड’ मान्यवरने अभी-अभी प्रस्तुत किए गए अपने एक विज्ञापनमें हिन्दू परम्पराओं और ‘रीतियोंको ‘रुढिवादी’ विचारवाला दिखाकर विवादोंमें घिर गया है । विज्ञापनमें आलिया भट्ट हैं, इसमें विवाहके मध्य होनेवाले ‘कन्यादान’को एक दमनकारी परम्पराके रूपमें दिखाया गया है और उसके स्थानपर ‘कन्यामान’को एक विकल्पके रूपमें सुझाया गया है ।
कन्यादानके हिन्दू अनुष्ठानके विरुद्ध, मान्यवरके अभियानकी ‘सोशल मीडिया’पर तीव्र आलोचना की जा रही है । ‘सोशल मीडिया यूजर्स’ने इस तथ्यको लेकर दुःख जताया कि ‘निकाह-हलाला’ और ‘तीन तलाक’ जैसी कुप्रथाओंके विरुद्ध जाग्रति हेतु पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता है; किन्तु ‘ब्रैंड’ने हिन्दू परम्पराओंके विरुद्ध धर्मयुद्ध आरम्भ किया है ।
एक ‘यूजर’ने ‘कम्पनी’के मूर्खतापूर्ण विज्ञापनपर भी अप्रसन्नता जताई; क्योंकि वास्तविकतामें, हिन्दू महिलाओंने जीवनके प्रत्येक क्षेत्रमें बडी उपलब्धियां प्राप्त की हैं । यही ‘बॉलीवुड’, पुत्रियोंको ‘पराया धन’ बताते हुए चित्रपट बनाता है और पुनः इसे हिन्दू धर्मसे जोडकर ‘समाज सुधारक’की भूमिकामें आ जाता है ।
‘सोशल मीडिया यूजर्स’ने आलियाको लक्ष्य बनाकर, भट्ट परिवारके उस इतिहासपर भी प्रकाश डाला, जब आलियाके पिता महेश भट्टने पूजा भट्टको लेकर कहा था कि यदि वह उनकी पुत्री नहीं होती तो वह उनसे विवाह कर लेते।
मान्यवर जैसे तथाकथित ‘ब्रैंड’, अपना व्यापार करनेसे कहीं अधिक, हिन्दू धर्मका अपमान करनेका व्यापार करने लगे है । हिन्दू बहुल्य देशमें, ऐसे ‘ब्रैंड्स’को इतनी छूट दी किसने ? हिन्दुओ, हम स्वयं अपने पतनके उत्तरदायी है; क्योंकि अभी तो हम इस समाचारको पढकर, मान्यवर जैसे ‘ब्रैंड्स’की कितनी भी निन्दा कर लें; किन्तु वस्त्र क्रय करना होगा, तो मान्यवर जैसे किसी हिन्दूद्रोही ‘ब्रैंड’पर ही जाएंगे । यही हमारे पतनका एकमात्र कारण है कि हम स्वयं ही ऐसे हिन्दूद्रोहियोंका पालन-पोषण कर रहे है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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